​कश्मीर – एक अधुरी कहानी

आज सुबह से कश्मीर के बारे में पढ़ रहे है, जहाँ देखो वहाँ पर उसी का जिक्र है, खैरियत है किसी आंतकवादी घटना के लिए आज सुर्खियों में नही है । कुछ सकारात्मक बाते सुनने को मिली आज जैसे कि कश्मीर की बेटी मिग-29 उड़ाने के लिए रसियन एजेंसीज  के संपर्क में है, ये बात इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बात तो वो बेटी है और दूसरी बात वो कश्मीर से है, आप समझ ही गये होंगे कि पत्थर और पुस्तक में से सही चुनाव कहाँ तक ले जाता है। वहाँ बेरोजगारी कहे या बेवकूफी, का ये आलम है कि अपने लोग, अपनी ही सुरक्षा करने वाले लोगो पर पत्थर फेंके जा रहे हैं और बुद्धिजीवियों की नज़र में वो सिर्फ भटके हुए नौजवान है ।

   
दूसरी बात भारत माँ के वीर सपूत चेतन कुमार, जिन्होंने मौत को ठेंगा दिखा कर के जिंदा होने का चमत्कार कर दिया हैं और उससे ऊपर उनकी ज़िंदादिली जो उन्होंने कैसे फील कर रहे हो , सवाल का जवाब ‘its rocking’ के रूप में दिया । न जाने ऐसे कितने ही सपूत इन तथाकथित भटके हुए नौजवानों के चक्कर में अपनी जान गवां रहै हैं, इनकी न तो नीति निर्माताओं को फिक्र है और न ही देशवासियों को । एक बात समझ नही आती हैं कि उन सभी वीर सपूतों को इतनी ऊर्जा कहाँ से मिलती है कि इतना होने के बावजूद तिरेंगे के लिए गोली खाने को तैयार है।

  
फिर खबर आयी कि एक लोकल टीम ने क्रिकेट मैच के दौरान न केवल पाकिस्तान जैसी दिखने वाली ड्रेस पहनी बल्कि पाकिस्तानी राष्ट्र गान भी गाया, इन लोगो को कब ये समझ मे आएगा कि जो देश खुद विदेशी मदद के टुकड़ों पर पल रहा है वो उनकी क्या तरक्की और अमन कायम कर पायेगा कश्मीर में, उनसे उनका खुद का बलूचिस्तान तो संभल नही रहा है वो कश्मीर की बातें कर रहे है।  जिस कश्मीर के लिए भारत के टैक्स पेयर्स के पैसे से टनल बनती है जिससे कि यातायात सुगम हो लेकिन उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ ही होता है।

   
शाम होते होते खबर आती है कि चीन अब पाकिस्तान का सपोर्ट करेगा POK के मुद्दे में, क्योंकि उसका मल्टी बिलियन डॉलर प्रोजेक्ट जो बन रहा है पाकिस्तान के साथ, चीन कभी भी अपने हितों की रक्षा करने से पीछे नही हटेगा , अब भारत को भी माकूल जवाब देना चाहिए वो भी कूटनीतिक तरीके से ।

   

कश्मीर को यह समझना चाहिए कि सबसे ज्यादा नुकसान उसी का हो रहा है , साला कश्मीर न होकर सलमान खान की शादी हो गयी , जिसके लिए पूरा देश इंतज़ार कर रहा है सिवाय स्वयं सलमान खान के । कश्मीर के सब लोगो से यही अपील है कि अमन से रहे और देश के विकास में सहयोगी बने।

11 thoughts on “​कश्मीर – एक अधुरी कहानी

  • May 16, 2017 at 8:08 pm
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    pehle bhartiya hone ke naate main bhi kashmir ko or uski aawam ko bharat ke sath kadam se kadam milata hua dekhna chahta hun lekin ek insaan hone ke naate kisi rastiyata ko pare rakh kar dekhu or vichar karun to main kashmir ki aawam aawam ke faisle ko sahi manta hun fir wah chahe hamare haq me ho ya fir indipendent kashmir ke ya fir pakistaan ke wahi behtar hai fir chahe wah barbaad ho jaye ya aabad iski jimmewari puri tarah waha ki aawam ki hogi na hamare mulk ki or na hamare mulk ke logo ki ek baar kashmir me sawtantra chunao hona chahiye jisse waha ki aawam ke man ki baat samne aaye or fir usi ke anusaar rup rekha teyaar ki jaye ! ye mayne kam rakhta hai ki hindustaan ki sarkar kya chahti hai sabse jyada mayne yah rakhta hai ki kashmir ki aawam kya chahti hai !

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    • May 16, 2017 at 8:30 pm
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      मेरी राय में ये भारत का आन्तरिक मामला है लेकिन मुख्य मुद्दा ये ही बन जाता है कि पाकिस्तान की भूमिका उसमे क्यो है , ये भारत का आंतरिक मामला है जिसको घसीटकर , युद्ध थोप कर अन्तराष्ट्रीय मुद्दा बनाया गया है। बलूचिस्तान के क्या हालत है वो किसी से छुपे हुए नही है तो कश्मीरी युवाओं को बहकावे में न आकर के भारत के साथ प्रगति से बढ़ना चाहिए।

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      • May 16, 2017 at 11:35 pm
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        बेशक पर कश्मीर और कश्मीरों का मुद्दा तब तक आप हल नही कर सकते जब तक आप वहा के लोगो की आवाज़ नही सुनते अगर आप उनसे जोर जबरदस्ती करेंगे तो वो विरोध करेंगे और वह हिंसा में भी बदल सकती है और बदलती रही है फिर आप उन्ही कश्मिरिओ पर पेलेट गन तान दोगे तो हल नही निकलेगा क्योकि अगर इसी से हल निकलना होता तो कब का निकल चूका होता इसी लिए यह जरुरी है की सवतंत्र चुनाव करा कर कश्मीरियो की राय जानी चाहिए वरना यह इसी तरह चलते रहेगा !

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        • May 17, 2017 at 7:59 am
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          जिनकी समझ चंद अलगाववादी के इशारों पर काम करती है तो अगर वो आज़ाद हो भी गए तो क्या उखाड़ लेंगे, कोई नया तानाशाह पैदा हो जाएगा वहां पर। भारतीय लोकतंत्र में जो उनको सहूलियत मिल रही है वो उनकी आगे की पुश्ते सिर्फ दादा दादी की कहानियों में सुनेगें। आपके पास पूरे विश्व मे देखने के लिए खूब उदाहरण है कि आजादी के नाम पर मानवता कितनी शर्मसार हो रही हैं।

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          • May 17, 2017 at 4:20 pm
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            agar unka chunao aazadi ka hota hai to main ye kehna chahta hun ki bharat sarkar unhe ek jhtke me alag na kare balki aisi sandhi ki jaye jisse jab tak kashmir me sthirta nhi aa jati rajnetik suraksha or dusre tarah ke mudde tab tak bharat sarkar uske sanrakshan ka kaam karegi or ye sab jaurui kyoki agar kashmir kamjor hoga to uspe kabza ho sakta hai jisse bharat ke liye dikke badhengi rahi baat kuch algavwadiyon ki to wo bharat ke dusre hisse me bhi hai farq sirf itna hai ki unka ilaka unki maang or savroop badal jata hai fir chahe wo kshetrawaad roopi RSS VHP SHIV SENA BAJRANG DAL YA fir Nakshalwaad ho ya kisi anyatarah ke ugrawaadi kashmir ki aawam itni bhi bewakuf nahi ho sakti ki wah apni kishmat ka faisla algaavwadiyon pe chhor de jis tarah se ham khud faisla karte hai thik usi tarah wo bhi kar sakte kashmir ko Media ne hamesha jyadatar galat tarike se paish karte aaya hai hame kashmir ke logo par bharosha dikhana hoga agar nahi dikhayenge to jahir Tanav badhega hi.

          • May 17, 2017 at 4:28 pm
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            जब सब कुछ भारत सरकार को ही करना है तो किससे आजादी और कैसी आज़ादी। जब भारत उस राज्य को अपना अखंड अंग मानकर पोषित कर रहा है तो उस राज्य को किस की आज़ादी चाहिए। भारत सरकार वहाँ पर इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है, रोजगार के अवसर बढ़ा रही है तो आज़ादी किससे और क्यो चाहिये। जब सब कुछ भारत सरकार को ही करना है कि कोई और मुल्क कश्मीर पर कब्जा न करे तो ये समस्या तो अरुणाचल प्रदेश हो या छत्तीसगढ़ हो , जहां पर कश्मीर जैसे ही भूले भटके लोग आज़ादी की मांग कर रहे है जबकि भारत सरकार और भारतवासी सभी इनको अपना एक अभिन्न अंग मानते है।

            रही बात मीडिया की तो सारे लोग TRP के पीछे पड़े हुए है और कट्टरवाद कोई भी हो व्यक्तिगत रूप से मैं उसका समर्थन नही करता हूं।

          • May 17, 2017 at 4:59 pm
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            swatantra rastra ki maang kashmir ki hamesha se rahi hai low of 370 pe sandhi hone ke waqt bhi or bharat ko kashmir ki madad is liye karni hogi kyoki agar kashmir par dushman rastra ka kabza hua to bharat ki suraksha bhi khatre me pad jayegi rahi baat nakshalwaad ki to wo aazadi nahi maang rahe unki mange alag hai. Lekin yah sare upay tab ke liye hai jab kashmir ki aavam savtantra rastra ka chunao kare

          • May 17, 2017 at 5:13 pm
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            मुझे अब तक समझ नही आ रहा है कि आजादी के क्या मायने हो सकते है, क्या आपको विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है, आपको पूरे भारत मे सबसे ज्यादा अधिकार एवं तवज्जो मिल रही हैं । मेरे विचार से कश्मीर की आज़ादी के मुद्दे को ही हथियार बना कर अलगाववादी या आंतकवादी कश्मीरी युवाओं को बरगलाने का काम कर रहे हैं। मेरे लिए तो आज़ादी के मायने यही है कि मुझे रोजगार के अवसर के साथ एक सम्मानित जीवन शैली मिले। अब धारा 370 हो या 740 , मुझे तो कश्मीरी भाईयों का फायदा भारत के साथ रहने में ही दिख रहा है। जब उनको आज़ाद होने के बाद दूसरे राष्ट्रों के आक्रमण की चिंताएं सता रही है तो वो अलग देश बन कर कैसे सर्वाइव करेंगे।

            रही बात दुश्मन राष्ट्र की तो भारत केवल कश्मीर ही नही, पंजाब , राजस्थान और गुजरात मे भी पूरी मुस्तैदी से दुश्मन राष्ट्र से पंगा ले रहा हैं।

            कश्मीर की आज़ादी के छद्म राग छोड़कर उसके बेहतर भविष्य के लिए भारत के साथ कदमताल करने में ही हम सब की भलाई है । जब उसके आज़ाद होने के बाद वो अपने अस्तित्व को बचा नही पायेगा और हम लोग फिर भी उसकी मदद करते रहेंगें।

            किसी भी क्षेत्र में हम पाकिस्तान से कम नही है और ये जो पाकिस्तान कश्मीर की आज़ादी का राग अलाप कर, अपनी अंगुली सीधी करने में लगा हुआ है।
            भारत के ही युवाओं से कश्मीर की आज़ादी की बाते सुनकर बड़ा दुख होता हैं, आप लोगो को पैलेट गन नजर आती है लेकिन वहां की हिंसा और आंतकवाद नजर नही आता ।

          • May 17, 2017 at 5:28 pm
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            chalo kam se kam ap ye to mante hai ki waha hinsa ho rahi hai pure kashmir me har roz curfue lagta hai har roz log pareshan hote hai dikkate badhti hai gussa badhta hai ek had tak use roka ja sakta lekin fir uske baad wo gussa fut kar bahar aane lagta hai or kashmir me ho rahe in sabhi ghatnao se ye baat saaf hai ki waha ki aawam pakistan or bharat dono hi mulko se gussa hai UN me dono hi desh ye kehte rahe ki paak kehta hai ki agar hamne apni fauj hata li to bharat pure kashmir par adhikar kar lega or bharat bhi yahi baat karta hai par afsos ki baat ye hai ki dono desh jis kashmir ke liye aapas me lad mar rahe hai us kashmir ki aawam kya chahti hai wo sun kar bhi ansuna dekh kar bhi andekha kar rahi hai kashmir adrak hai jo okhli me pada hua hai or PAK or IND dono okhli ke saman use khut rahe hai ab to ek tisri okhli bhi kutai kar rahi hai Chin main ek bhartiya hun lekin iska matlab ye nahi ki me andhrastrawaadi hokar dusro ki takleefo unki mango unke adhikaro ka hannan hota dekhta rahun !

          • May 17, 2017 at 7:41 pm
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            आपकी आखरी लाइनों ने दिल जीत लिया, उम्मीद है कि बाकी राष्ट्रीय या लोकल स्तरों पर हो रही समस्याओं पर भी आपको तकलीफ होती होगी । एक इंसान होने के नाते में भी सोच सकता हूँ लेकिन जहां पर राष्ट्रीयता की बात आती है तो मेरे लिए कश्मीर में आंतकी, हिंसा या तनाव हो या छत्तीसगढ़ में तथाकथित नक्सली हमले हो या अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ हो। मेरे लिए यह सारे मुद्दे उतने ही महत्वपूर्ण है जितना कि कश्मीर का मुद्दा।

            मेरी ईश्वर से एक ही प्रार्थना हैं कि अखंड भारत में सभी लोग अमन चैन से रहे और देश प्रगति के पथ पर तरक्की करें।

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