आम आदमी का मायाजाल

 

ये तो पता है कि आप लोगो को इतिहास में उतना ही इंटरेस्ट है जितना आम  भारतीयों को जिओ के ऑफर के समय, एयरटेल के नए प्लान्स में और हमारे पड़ोसियों (पाक, चीन) को शांति बनाए रखने में। अब अगर इतिहास बता दिया तो गूगल और विकिपीडिया को अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी, वैसे भी बिंग और याहू तो सेल्फ गोल करके अपनी दुकान के शटर बंद कर ही चुके हैं और फिर हमारे दादा – नानी की कहानियों का क्या होगा जिनमे हर बार इतिहास का जिक्र होगा , अरे नही ये क्या बता दिया आपको, दादा/नानी क्या होते है, अरे वो ही तो नही जो पास के वृद्धाश्रम में रहते हैं और मम्मी मुह चढ़ाकर होली-दीवाली उनसे मिलने जाती हैं । आपको फिर भी इतिहास जानना ही है तो अलग अलग राज्य में कोई न कोई संस्था, या ग्रुप तो होगा ही जिसे खुद से ज्यादा इतिहास के बारे में पता होता हैं, नही समझे, अरे राजस्थान में ‘करनी सेना’, गुजरात मे ‘पटेल सेना’ तो महाराष्ट्र में शिव सेना ने मोर्चा संभाल रखा है। अगर कमी रह भी गयी तो भारत की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे ‘होनहार’ पीएचडी धारियों की भी तो कमी नही है।

चलो अब शुरू करते है आज पर, जिस पर कोई बात नही करना चाहता है , सब भविष्य और भूत में जूझ रहे होते है । भले ही 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने की बात हो लेकिन जंतर मंतर पर तमिलनाडु के किसान लगभग 30 दिनों से किसी को नज़र नही आ रहे हैं । भले कल के नए ‘इंडिया’ के सपने दिखाए जा रहे हो लेकिन कई लोग आत्महत्या कर रहे है, उन्हें वेब पोर्टल की नही सहानुभूति की जरूरत है। जवानों को ‘भारत के वीर’ की जरूरत नही है, वो कश्मीर में पहले आंतकवादी से लड़े, पाक सैनिकों की सीज फायर उल्लंघन को झेले और फिर भी कुछ बच जाए तो कश्मीरी है ही पत्थर फेकने के लिए और जलील करने के बाद सोशल मीडिया पर उनका वीडियो पोस्ट करने के लिए । उन जवानों को जरूरत है तो सम्मान की, उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा की, पता नही उनके लिए कब ‘अच्छे दिन’ कब आयेंगे और उन्हें पतली दाल और जले हुए पराठो से छुटकारा मिलेगा । ये कश्मीर नही साला, गरिलफ़्रेंड हो गयी जो किसी के समझ मे ही नही आती, सरकारों का क्या वो तो बदलती रहती हैं।
भविष्य , यही है जिस पर लोग सब सपने संजोए हुए है, दिल्ली में फ्री wi-fi मिल जाएगा, लड़किया रात को 12 बजे बेखौफ होकर चांदनी चौक में घूमेगी । राजस्थान में गर्भ में ही नही मरेंगी, रिफाइनरी भी लग ही जाएगी और सीएम भी 8 पीएम  के बाद काम करेंगे । हार्दिक पटेल को भी लगता है कि वो पटेल आंदोलन के दम पर अगले गुजरात चुनाव जीत ही लेगा। अब इसे उम्मीद कहे या वहम कि evm में खराबी से ही योगी जी up में जीत गए और मायावती को लगता हैं कि एक साल में ही मध्यावधि चुनाव हो जाएंगे और युगपुरुष दिल्ली के साथ ही मिज़ोरम के भी मुख्यमंत्री बन जाएंगे । उम्मीद और वहम में सिर्फ पतली रेखा होती है जो आदमी के दिमाग की सारी रेखाए हिला देती हैं, यकीन नहीं हो रहा है तो ट्रम्प का चुनाव देखलो, राहुल गांधी का कॉन्फिडेंस और कांग्रेस को अभी भी यही लगता हैं कि अगर राहुल कांग्रेस अध्यक्ष बन गए तो वो MCD चुनाव जीत जाएंगे और उदय चोपड़ा को लगता है कि उनके बिना ‘धूम सीरीज’ फ्लॉप हो जाएगी ।
जहाँ लोग क्या क्या नही सोच रहे है और एक हम है जो कूलर में पानी और फ्रिज में बोतल रख कर ही अपने जीवन को संपूर्ण मान रहे हैं । अगर इस गर्मी में अगर ठंडा मटकी का पानी मिल जाये तो भले ही जिहादियों को बम विस्फोट के बाद  जन्नत में 24 हूरे मिले या न मिले , जादवपुर यूनिवर्सिटी में धरने के बाद कश्मीर को आज़ादी मिले या न मिले , गौ रक्षको के इतने प्रयास/मारपीट के बाद भी गौ हत्या रुके या न रुके लेकिन हमे तो यही ठंडा पानी अमृत सा लगने लगता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: