​आईपीएल – इंडिया का त्यौहार !

 

एक बार फिर आईपीएल दस्तक दे रहा है हमारे घर मे, इस बार कुछ नया तो कुछ पुराना ही दोबारा रिपीट हो जाएगा । पतियों में सहनशीलता का जो आजकल प्रभाव है वह सिद्धू की वजह से क्योंकि जो आदमी  सिद्धू  की कमेंटरी झेल सकता है , उसके लिए बाकी फिर दुनिया में कुछ भी झेलना मुश्किल नही हैं। लेकिन इस बार बड़ी राहत की खबर की साहब को कपिल शर्मा शो और मंत्रालय  के कारण समय नही मिल पा रहा था।

पति और कर भी क्या सकते हैं क्योंकि ला-लीग, एनबीए, प्रीमियर लीग तो पत्नियों को समझ आता है नही । पतियों की हालत अभी बिल्कुल स्टार स्पोर्ट्स जैसी है जो आईपीएल में कुछ कर भी नही सकता , हॉटस्टार ही उनकी आखरी उम्मीद बन जाती है।

सभी लोग अपने अपने हिसाब से तैयारी कर रहे हैं कुछ डाई हार्ड फैंस हैं जो धोनी को कप्तानी से हटाने के बावजूद पुणे को सपोर्ट कर रहे हैं, तो कोई अपनी एसआरके के प्रति दीवानगी केकेआर के रूप में निभा रहा है । सबसे बड़ा सवाल आजकल घर के मर्दो में यह है कि नागिन, कुमकुम भाग्य के बीच मे मैच कैसे देखेंगे , उनकी समस्या और भी बढ़ गयी क्योंकि कमबख्त वीकेंड को भी इन सिरियल्स ने नहीं छोड़ा । भले ही ‘ये रिश्ता क्या कहलाता ‘के चक्कर में खुद का रिश्ता बर्बाद हो जाये पर उन्हें प्राइम टाइम का अपना एकाधिकार खत्म नही होने देना है । कपिल शर्मा और पतियों की हालत आजकल बिल्कुल समान ही हैं , वो अपना शो बचाने की जुगत में लगा है तो ये आईपीएल देखने के जुगाड़ में ।

इन दिनों कम से कम न्यूज़ चैनलों के अत्याचार तो कम हो जाते हैं क्योंकि वो भी कैटरीना की पतली कमर से आगे बढ़कर , चीरलीडर्स पर फोकस करने लग जाते हैं । कुछ बाबा मैच से पहले हरी चटनी खाने की सलाह देते तो नजर नही आते हैं ।

लेकिन आम आदमी के लिए समस्या ख़त्म नही हो जाती क्योंकि हर नुक्कड़ पर इतने क्रिकेट विशेषज्ञ हो जाते हैं कि इतने तो नवरात्रों में डांडिया खेलने नही आते । उनका बस चले तो डिविलियर्स से 360 की जगह 720 का शॉट लगवा दे, धोनी को हेलीकॉप्टर शॉट की जगह रॉकेट शॉट लगवा दे । इन से तो स्वयं भगवान भी नही बच सकते हैं ।

फिर आता है विदेशी खिलाड़ियों का मामला, ऐसा लगता हैं जैसे वो यहां बिरयानी खाने और ऑटोरिक्शा में बैठने के लिए ही आते हैं। उन्हें खुद नही पता वो कितने मैच खेलने वाले है क्योंकि कब कोई स्वप्निल असनोदकर कब शेन वार्न की जगह ले ले, कुछ समझ नही आता और कुछ खिलाड़ी तो सिर्फ आते ही घूमने के लिये लेकिन कुछ भी कहो इन विदेशी खिलाड़ियों के बिना आईपीएल अधूरा सा लगता हैं ठीक वैसे ही जैसे बिना शक्कर की चाय । चाहे वो गेल हो या वाटसन हो या डिविलियर्स हो सब इस एक महीने में अपने से लगने लग जाते हैं , हम सभी इनके खेल के दीवाने है और आगे भी यह अपना मनोरंजन करते रहेंगे ।

हद तो तब हो जाती है कि इस त्योहार को मनाने के लिये भी गणेश उत्सव, नवरात्र उत्सव, होली आदि सारे त्योहारों को मनाने के लिए कमिटियां बन जाती है तो इस बार आईपीएल उत्सव समिति भी बन ही गयी, जिसका काम ये होता हैं कि पहले चन्दा इकट्ठा करो। फिर मौहल्ले के बीच मे, गली के नुक्कड़ में या सोसाइटी के क्लब हाउस में एक बड़ी स्क्रीन लगा दी जाती हैं और फिर लिया जाता है आनंद ।

चलो हमारी बातें तो होती रहेगी , आठों ओपेनिंग सेरेमनी के साथ सारे मैच का आनंद उठाइये और बाकी का भी दिन बे दिन इंतज़ार करिए ।

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