​Long Weekend की मोहमाया !

 

जब भी लोंग वीकेंड का नाम आता है तो सभी नौकरी पेशा लोगो के मन मे लड्डु फूटने लग जाते है, अरे वो कैडबरी वाले नही खुशी के । जब भी कभी कोई राष्ट्रीय या प्रांतीय त्यौहार या हॉलीडे हो और वो शुक्रवार या सोमवार को हो तो वो सोने पे सुहागा हो जाता हैं। 

 

सरकारी ऑफिस में तो कितना काम होता है वो तो राहुल गांधी भी बता सकता हैं भले ही वो आलू की फैक्टरी लगा सकते हो । सरकारी ऑफिस में काम करने वाले लोगो के अजीबोगरीब प्रतिभाए के बारे में अगर पता चल जाये तो इंडिया गोट टैलेंट वाले तो सरकारी ऑफिस के चक्कर मार रहे होते है। अगर काम के साथ स्वेटर नही बुना जाए तो महिला कर्मचारी अपने अस्तित्व पर संकट मान लेती हैं और अघोषित इमरजेंसी लग जाती हैं। चाहे योगी जी हो या मोदी जी चाह कर भी वो सरकारी ऑफिस को साफ नहीं कर सकते, जो कला कोने में, अहाते में, बरामदे में पिचकारी से पेंटिंग बनाने की इन सरकारी बाबुओं में , अगर आज पिकासो होता तो खुद ही अपना गला घोंट कर मर जाता , जैसे बिना बारिश के मजबूरी में किसान लोग कर रहे है ।

  
लोंग वीकेंड का नाम सुनते ही लोगो की आंखों में चमक आ जाती है फिर बनने लगते है प्लान्स, गोआ का, मैसूर का, लोनावाला कक, कूर्ग का, कही ट्रेकिंग का, कही योगा सेशन्स का तो कही आर्ट ऑफ लिविंग के कैम्प का लेकिन सब को पता है कि हमारे यहाँ प्लान कितने सफल होते है । अगर होते तो ‘योजना आयोग’ का भी नाम बदलकर ‘नीति आयोग’ नही करना पड़ता, जब देश की लगभग 15 सरकारों से प्लानिंग नही हो पाई और जिसे 10 साल के लिए शुरू किए थे उसे अभी तक झेल रहे , अरे नही आरक्षण की तो यहां बात बिल्कुल नही हो रही है । अब आप समझ ही गये होंगे कि जिस ‘प्लानिंग कमीशन’ का सेकेट्री ही ‘अपने कोटे’ से सेलेक्ट होगा तो फिर चाहे नाम बदल कर नीति की जगह चाहे कर्म भी कर दो होना कुछ भी नहीं है । अगर कुछ हिन्दू या मुस्लिम घुसा दिया तो फिर देखो वो थार रेगिस्तान में भी गार्डन लगा देंगे और गंगा नदी तो क्या लंदन की थेम्स नदी भी साफ करवा सकते हैं। ये जो विशेष शक्ति(हिन्दू/मुस्लिम) दुनिया के कुछ ही देशों को प्राप्त है और शायद हम उसमे प्रथम भी है।

   
जब ग्रुप के कुछ लोग हरी चटनी के साथ समोसे और काला पर्स रख कर देख लिए तो उन्हें भी विश्वास होने लगा कि अब की बार मोदी और ट्रम्प सरकार के बाद इस वीकेंड में तो गोआ का प्लान बन ही जायेगा । अब तक तो व्हाट्सएप पर ‘long waited Goa Trip’ नाम के ग्रुप भी बन गए होंगे, इनमे गुड मॉर्निंग की जगह ट्रेवल फोटोज और मेमेज़ के ही फारवर्ड मैसेज आ रहे होंगे । अब आप समझ ही गये होंगे कि कितनी उत्सुकता है इस बार, अगर गोआ मंगल ग्रह पर होता तो नासा और इसरो के वैज्ञानिकों की कई सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है। कई घण्टो की वीडियो कॉल, लगभग 10 लाख के आसपास मैसेज और हज़ारो मेमेज़ में दोस्तो को टैग करने के बाद अब शायद ये प्लान बन ही जाए।

  
कुछ लोग होंगे जो अभी तक लेह लद्दाख का प्लान तो नही बना पाए लेकिन कूर्ग तो घूम ही आते है इस बार, जी हा आप सही समझे बात बाइकर ग्रुप्स की हो रही है । बाइकर्स और खासकर बुलट वालो के साथ एक ही सामान्य भारतीय समस्या है जैसे हरिद्वार में डुबकी लगा कर बाकियों के पाप धुल जाते है ठीक वैसे ही उनका लेह लदाख ट्रिप हो गया तो समझो जीवन सफल हो गया, इतनी खुशी तो इस आरक्षण के दौर में जनरल वाले को चपरासी बनने में नही होती है , जितनी इस ट्रिप से। वो अपने सिर  पर लगा बदनामी का दाग भी लदाख झील में धो देता है क्योंकि अब उसे बार बार ये जवाब नही देना पड़ेगा कि बुलट है और लदाख ट्रिप पर अभी तक नहीं गया है। आम लोगो को क्या पता बुलट मेंटेन कैसे होती है ।

  
लोंग वीकेंड पर कुछ कंपनी भी ऐसे बीहेव करती है जैसे इस वीक के सारे खर्चे उन्हें ही उठाने है और हम तो बस यूँही क्रेडिट कार्ड के बिल चंदा और बैंक की गरीबी कम करने में लगे है जिससे कि वो किसी माल्या या सहारा जैसे गरीबो को लोन देकर उनका कल्याण कर सके। makemytrip और अन्य ट्रेवल कंपनी तो जैसे बस ऐसा फील करवाती हैं कि तुम न तो कल कुछ उखाड़ पाए थे और न ही कल कुछ उखाड़ पाओगे। ये ऐसे ऑफर देती है कि 5000 में थाईलैंड घूम के आ जाओ जैसे  टिकट के अलावा वह आदमी बस रोड़ पर सो जाएगा या दो दिन व्रत तो रह ही लेगा।

 

कुछ लोग होंगे जो बिज़नेस ट्रिप के नाम पर दुबई घूमने चले जाते हैं, उनका बिज़नेस प्लान इतना सीक्रेट होता है कि सीबीआई या आईबी को भी बरस लग जाते है, इसे पता लगाने में। ये वही बंदे होते है जो सफल होने के कोट्स अपनी fb वाल पर जड़ते रहते हैं और जल्द ही IT या अपनी करंट जॉब छोड़कर अपना खुद का बिज़नेस स्टार्ट कर रहे होते है। ये लोग आपके नजदीकी कैफ़े कॉफ़ी डे या ऐसे ही टाइम पास वाली जगह मिल जाएंगे। भारत मे जहाँ फ्री के सपनों के नाम पर जिओ चल सकती है तो इनका भी सो कॉल्ड बिज़नेस भी चल ही जाता है। लोंग वीकएंड तो इनके लिए वरदान होता है।

 

फिर शुरू होता है पोस्ट का खेल, 20 गोल्स बिफोर 30, बेस्ट डेस्टिनेशन अंडर 5k, ट्रेवल ट्रिप और एक बात समझ नही आती कि एक पहाड़ पर खड़े लड़के की तस्वीर पर इतना ज्ञान बांट दिया जाता है कि वो उसे हिल स्टेशन न समझकर सुसाइड पॉइंट समझ लेता है ।जितना यहां पर ट्रेवल और सपनों के नाम पर कटता है , उतना तो शिफूजी भी नही काटता लोगो की।

  
तीन या चार दिन की छुट्टियां हो और ई-कॉमर्स कम्पनीज कुछ न करे ऐसा हो नही सकता क्योंकि भले ही ओला और उबेर सर्ज प्राइस लेना बंद कर ले , लेकिन उनका कुछ न कुछ दिन तो आ ही जाते है, बिलियन डे, ग्रेट इंडियन फेस्टिवल या समर एक्सप्रेस जैसा कुछ न कुछ तो। इसी बीच बिग बाजार और मोर मेगा स्टोर भी बहती गंगा में हाथ धो ही लेते है । इतने ऑफर्स और एडवरटाइजिंग की एक आम आदमी कंफ्यूज हो जाता हैं कि उसे खरीदना क्या है। भले ही वो पिछले 10 दिन से दाल चावल पर ही ज़िंदा हो लेकिन वो खरीद लेगा ऑटोमैटिक टोस्टर , अब इस महँगाइ में ब्रेड और खरीद के ले आवो।

   
और एक और हमारे जैसे भी है जिन्हें लोंग वीकेंड सिर्फ सोने का बहाना मिल जाता है, अपने बेड से उठने में इतना ज़ोर आता है कि अगर यमराज भी बोल दे कि आज तेरी ज़िंदगी का आखिरी दिन है तो भी बन्दा 20 घण्टे तो ये सोच कर सो जाएं कि पता नही मरने के बाद सोने को मिलेगा या नही । बाकी बचा दिन आईपीएल देख कर ही निकाल देते है क्योंकि आईपीएल जब अपने 10 साल उनके नाम कर रहा हो तो बन्दा वैसे ही खुशी के मारे मार जाए। पूरा दिन यू ही फेसबुक और ट्वीटर की न्यूज़ फीड पढ़ कर ही निकाल ले  और फिर भी अगर टाइम बच गया तो शॉपिंग के नाम पर एक दो टीशर्ट और स्लिपर्स खरीद के ले आएंगे, अगल बगल के किसी मॉल से।
   
फिर जब ये वीकेंड बीत जाता है तो असली अत्याचार शुरू होता हैं, फेसबुक पर, ट्वीटर पर, इंस्टाग्राम पर या स्नैप चैट पर। शरू होता है फोटोज़ अपलोड करने का सफर, सभी घर पर बैठे लोगों को याद दिलाने के लिए । एक ट्रिप के बाद फोटोज़ और दोस्तो को टैग करना उतना ही जरूरी है जितना कि मोदी को भाइयों और बहनों बोलना या राहुल का महिला सशक्तिकरण के बारे में बयान देना। एक बार के लिए सचिन ओवर पिच बोल पर स्ट्रैट ड्राइव खेले या न खेले लेकिन बैंगलोर या पुणे में बैठे बन्दे का राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव में बैठे दोस्त को टैग करना बहुत ही आवश्यक हैं। ये सिलसिला एक-दो दिन ने चल कर अगले कुछ हप्तों या महीने तक चलता है जब तक कि नया वीकेंड नही आ जाता ।

अभी भी किसी कंफ्यूजन में हो तो यहाँ क्लिक करे !

2 thoughts on “​Long Weekend की मोहमाया !

  • April 18, 2017 at 6:59 pm
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    Enjoyed this post.
    I really liked the humor on bikers…It’s true Leh Ladakh trip is like visiting Mecca and Medina! Long weekend in India means everything will be sold out unless you plan well in advance.

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