WhatsApp – मेरी कहानी, मेरी जुबानी ! पार्ट -2

जब व्हाट्सएप्प नया नया लांच हुआ तो लोगो को लगा कि ये भी फेसबुक या ट्वीटर जैसा ही कुछ होगा और केवल कुछ ‘पढ़े-लिखे’ लोगो तक ही सीमित रहेगा लेकिन इसने लोगो को ऐसा लपेटे में लिया कि बीजेपी को भी मिस्ड कॉल देकर मेम्बर बनाने पड़े। जब कुछ फ्री में मिल रहा हो तो लोग एक बार तो ज़हर भी ले लेंगे । इसके बाद लोग एक दूसरे से जुड़ने लगे जिनको पहले से जानते भी थे और सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें एंजेल प्रिया या स्मार्ट रमेश का कोई चक्कर नही था। लोग मेसज से निकल कर व्हाट्सएप्प पर आ गए, जो टेलिकॉम कंपनियां त्योहारों के दिनों में मैसेज को महंगा कर देते थे, अब उनको कोई पूछने वाला भी नही था, धीरे-धीरे नोकिया और कांग्रेस मार्किट से बाहर हो गए, एक ने अपने को समय के अनुसार नही बदला तो दुसरे ने समय ही बदल दिया।

अब बारी आई ग्रुप्स की, किट्टी पार्टी के लिए अलग, सोसाइटी के लिए अलग, फैमिली के लिए अलग, ट्यूशन के लिए अलग, समाज के लिए अलग, यहाँ तक कि आंतकवादी भी हाई-टेक हो गए उनके ग्रुप्स के नाम ‘दिल्ली धमाका, मुम्बई धमाके, ट्रैन धमाका, म्यूनिख धमाके। धीरे – धीरे ISIS भी आने लगा और अपनी पहचान के लिए स्ट्रगल कर रहा है ठीक वैसे ही जैसे कोई न्यू -कमर बॉलीवुड के लिए करता है।

धीरे धीरे ‘अच्छे दिन‘ भी आने लगे और समय के साथ मैसेज के साथ कॉल और वीडियो कॉल भी शुरू हो गया और रही सही कसर जिओ ने पूरी कर दी। अब बिना वीडियो कॉल के बात करना अपराध की श्रेणी में आने लगा, भले 2MP कैमरे से आप की अच्छी खासी फ़ोटो आधार कार्ड जैसी दिख रही हो लेकिन वीडियो कॉल उतना ही जरूरी हो गया जितना कांग्रेस के लिए हार के कारणों की समीक्षा करना और सपा के लिए साईकल से पंचर निकलवाना। वीडियो कॉल की इस बहार में कब एयरटेल और अन्य कंपनियो को दिन में तारे दिखा दिए ।

इन ग्रुप्स के कुछ अघोषित नियम भी बनने लगे, जैसे कि सुबह उठते ही सबको गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजना, भगवान की पूजा करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया। जो लोग एक दूसरे के सामने मुँह चढ़ाकर चलते है वो भी ग्रुप में प्यार की पींगे पढ़ रहे थे। कुछ ग्रुप तो सिर्फ हेल्लो, हाइ तक ही सीमित हो गए तो कुछ सिर्फ फॉरवर्ड मैसेज तक ही सीमित होने लगे। किसी नन्ही सी बालिका के दिल के छेद के लिए पोस्ट शेयर किए जाने लगे तो कभी जवानों की डेड बॉडी या क्षतिग्रस्त बॉडी के मैसेज भेज कर देशभक्ति पढ़ाई जाने लगी। कही पर किसी सुअर को मारने के लिए मेसेज आते तो कभी गौ रक्षा के नाम पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का ठेका लिया जाता।

कुछ लोगो ने दिन के हिसाब से भगवान भी तय कर लिए और उस दिन चयनित भगवान के फोटोज़ ग्रुप में भेजे जाने लगे । अगर आप सुबह उठते हो और आपको पता करना है कि आज कोनसा दिन है तो ग्रुप का मैसेज आपको सब बता देगा। कुछ धर्म और समाज के ठेकेदार बन गए जो हर अनचाही जगह पर समाज या धर्म को घुसेड़ने लगे। कुछ कहानियां शुरू हो गयी जिन्हें फारवर्ड करते ही आप के लॉटरी लगने या सफल होने की गारंटी मानी जाने लगी। जब कोई एक मामूली सा एप्प डेवलपर अगर इंडिया को गरीब कह दे तो आप स्नैपडील की एप्प अनइंस्टाल करना शुरू कर देते है। अफवाहों का बाजार इतना गर्म हो जाता है कि एक बार तो खुद भगवान भी चक्कर मे पड़ जाए कि सही बात क्या है। हालात यहाँ तक आ जाते है कि सीरिया के युद्ध की फोटोशॉप इमेज दिखाकर मुजफ्फरनगर में दंगे शुरू हो जाते हैं और प्रसाशन को इंटरनेट तक बंद करना पड़ता है। कभी बादल में मोदी दिख जाता है तो कभी योगी।

अब समाज के ठेकेदारों के लिए और भी आसान हो गया है किसी की भी भावनाओं की बखिया उधड़ेने में। ये लोग अपने चेले – चपाटों के साथ झूठ का ऐसा चक्रव्यूह बनाते हैं कि अभिमन्यु तो क्या अर्जुन भी बाहर नही निकल पाये। समाज को अपने हितों के लिए बाटना बहुत आसान हो गया है, उदाहरण की कमी नही है , थोड़ी देर इंटरनेट बन्द कीजिये और ठंडा पानी पीकर आसपास देखिए आपको सब पता चल जाएगा, इतना जल्दी तो बोधि वृक्ष के नीचे भी बुद्ध को ज्ञान प्राप्त नही हुआ होगा।

इसी के साथ कुछ लोग ज्ञानी भी हो जाते है वो इतना ज्ञान बाटते है सुबह से लेकर शाम तक कि अगर रहीम या कबीर होते तो वो भी एक बार इनके चरणों मे पड़ जाते । हर किसी जीवन दर्शन को चाणक्य के साथ जोड़ना फैशन बन गया। जिस व्यक्ति की अपने घर मे कोई नही मानता है, वो सोफे पर बैठे हुए दुनिया बदलने की बात करता है  भले खुद से तकिए का कवर भी न बदल पाये। अगर व्हाट्सएप्प चाहे तो इन सभी अमूल्य रचनाओं को संग्रहित कर पुस्तक प्रकाशित कर सकता है जिससे कि उसका भी रेवेन्यू बढ़ जाये।

व्हाट्सएप्प कई परिस्थितियों में उपयोगी भी है लेकिन आप सोच समझकर ही इसका इस्तेमाल करे और कभी कभी गूगल को छोड़कर स्वविवेक भी इस्तेमाल कर लेना चाहिए। अपनी भावनाओं का स्तर इतना नीचे न रखे कि वो किसी के तुच्छ कमेंट या फोटोशॉप्ड इमेज से आहत हो जाये। स्वस्थ रहे, मस्त रहे !

पार्ट-1 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

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