​अफीम – मेरी कहानी, मेरी जुबानी !

 

अगर मेरे जन्म स्थल के बारे में आपको जानना है तो फिर मुझे किसानों के बारे में सुनाना पड़ेगा क्योंकि आजकल दिल्ली हो या चेन्नई, न केजरीवाल को और न  ही किसानों को,  दोनों को ही कोई सीरियसली नही लेता , अगर कोई लेता होता तो तमिलनाडु के किसानों को यहाँ जंतर मंतर  पर 30 दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन नही करना पड़ता और केजरीवाल को उपचुनावों में हार का सामना नही करना पड़ता और रही सही कसर कविराज के वीडियो ने पूरी कर दी और सहनशीलता की हद देखिये युगपुरुष जी उसी वीडियो को शेयर कर रहे थे। चलो छोड़ो उनको तो उनकी जितनी बातें करेंगे उतनी ही कम पड़ती चली जायेगी।
मेरी खेती के लिये सरकार भी लायसेंस देती है मतलब बिना सरकार की परमिशन के आप खेती भी नही कर सकते हो और भारत मे लायसेंस कैसे बनते है उसके बारे में किसी और दिन बात करेंगे , जब पाक दूतावास में काम करने वाले का यहा आधार कार्ड बन सकता है तो फिर कुछ भी हो सकता है। अब आपको समझ आ ही गया है कि जिसकी खेती के लिए लाइसेंस लेना पड़ता हो तो मुझे बिना कुछ कहे ही ‘VVIP‘ स्टेटस और ‘Z-Plus‘ सेक्युरिटी मिल जाती है। भले ही सरकार के गोदामों में लाखों रुपये का गेंहू सड़ जाए लेकिन मेरे लिए तो पूरा महकमा आता है पूरे गाजे बाजे के साथ, मुझे किसान के घर से लाने के लिए । जिन लोगो को VVIP कल्चर के बारे में ज्यादा पता नही है वो मेरी तुलना गेंहू की खेती से कर ले तो उन्हें सब कॉन्सेप्ट समझ आ जाएंगे कि ‘आम’ और ‘खास’ में क्या फर्क होता है वो भी बिना ‘चाणक्य‘ और ‘एलेन‘ की कोचिंग के । एक बात तो मुझे भी समझ नही आती कि इतनी मेरी कीमत होते हुए भी मुझे पाल पोस कर बड़ा करने वाला किसान ‘गरीब‘ कैसे रह जाता है, किसान के अलावा सभी मेरे से जुड़े लोग ‘बोलेरो‘ में ही घूमते हुए नजर आते है।

 

मेरी क़ीमत का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हो कि अगर  आम आदमी अपनी किडनी भी देना चाहे तो भी दो चार किलों में ही उनकी दोनों किडनियों को निपटा सकती हूँ। इसी क़ीमत के खेल से शुरू होता है कालाबाजारी, तस्करी और न जाने क्या क्या। इस पूरे खेल में इतने लोग जुड़े होते है कि अगर मेने (मतलब अगर अफीम खुद बोल उठी तो) अपना मुंह खोल दिया तो कई राज्यो क्या देशों की सरकारें पलट जाएगी। किसान के खेत से लेकर बॉर्डर तक जो सफर होता है वो इतना रोमांचक होता है कि चाहे तो MTV वाले रोडीज़ के दो-तीन सीजन बना सकते है।  हर जगह के रेट फिक्स होते है, जितने कंधे पर स्टार, जितनी सफेद पोशाक की जेब की लंबाई, मुहँ देख कर तो तिलक निकालना कोई इनसे सीखे । जितनी कीमत तो महंगाई में प्याज की नही बढ़ती उतनी तो एक चौकी से दूसरी चौकी में जाने में ही बढ़ा लेती हूँ, अपने भी ठाट कोई टाटा-बिड़ला से कम नही हैं।

 

मेरे  ही कीमत के मायाजाल में दाऊद, मिर्ज़ा जैसे तस्कर बने है जो मानवता के लिए श्राप बन गए है, कीमतों के खेल में कब इंसान की ज़िंदगी मेरे से हार गई पता ही नही चला। हेरोइन,चरस, कोकीन पता नही किस किस नाम और कलर से मुझे बेचा जाता हैं । सब की कीमत अलग तो जलवे भी अलग, कभी रेव पार्टी तो कभी 5 स्टार पार्टी में इस्तेमाल होता है। वैसे भी हम भारतीयों का कानून तोड़ने में कोई सानी नही है क्योंकि जो मज़ा बिना हेलमेट के ट्रैफिक पुलिस के सामने सिग्नल तोड़कर निकलने में है वो तो पूरे जीवन मे सीट बेल्ट बांध के कार चलाने में नही आ सकता।

 

फिर शुरू होता है मेरे उपयोग का खेल, सरकार किसानों से ओने-पौने दामों में खरीद कर बड़ी क़ीमत पर फार्मा कंपनियों को बेच देती है और वही कंपनियां 1 रुपये की दवाई के 1000 रुपये उसी किसान से वसूलती है फिर जेनेरिक दवाइयों के नाम पर लॉलीपॉप भी आम आदमी को ही दिया जाता हैं। ये रहस्य तो सलमान भाई की शादी से भी बड़ा है कि एक समान साल्ट उपयोग में होने पर एक दवाई 1 रुपये में तो दूसरे ब्राण्ड की 45 रुपये में कैसे बेच देती है, इसके पीछे का सारा खेल तो आप लोगो को पता है ही।

 

एक और भी उपयोग होता है जिस पर मुझे भी समझ नही आता है , कुछ लोग एक साथ बैठकर मुझे पानी मे घोट कर, फिर उसे रुई से छानकर बड़े चाव से पीते है । ये रेसिपी तो खुद ‘संजीव कपूर‘ भी नही जानते है जो विशेषरूप से राजस्थान के मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्र में बहुत ही प्रसिद्ध है । इतना आनंद तो शायद देवताओं को अमृतपान करने में भी नही आया होगा जितना ये लोग मेरे सेवन पर आनंदित होते हैं।  ये समाज में प्रतिष्ठा का मापदण्ड होता है कि कौन अपनी जेब की औकात से भी ज्यादा मेरे इस विशेष पेय पदार्थ को पिला पाता है, अभी भी आप को समझ नही आ रहा है तो वैसे भी आम आदमी को इनफ्लेशन  रेट से क्या मतलब , उसे तो प्याज और भिंडी के दाम ही समझ आते है । आंकड़ो का खेल तो सिर्फ अगले चुनावों में वोट पाने के लिए खेला जाता है ।

पार्ट -2 पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे !

5 thoughts on “​अफीम – मेरी कहानी, मेरी जुबानी !

  • April 18, 2017 at 5:50 am
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    जोरदार 👌👌👌 सही दिशा में जा रहे हो

    Reply
    • May 11, 2017 at 4:51 pm
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      धन्यवाद RP !
      आपका फीडबैक हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।

      Reply

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