आम आदमी, AAP और दिल्ली !

अगर आप दिल्ली से हो या दिल्ली सरकार या आम आदमी पार्टी (AAP) को फ़ॉलो करते हो तो आप सबसे हँसमुख और जिंदादिल इंसान हो क्योंकि आप हो या दिल्ली सरकार दोनों ही आपके मनोरंजन का पूरा ख्याल रखते है। वैसे तो आप भारतीय राजनीति में नए नवेले है तो उन्हें दांव पेंच के बारे में ज्यादा पता है नही और साथ ही दिल्ली की जनता ने उनको भारी बहुमत से जीता कर उनके पंख लगा दिए।

 

पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स के कारण पंजाब उड़ रहा हो या नही लेकिन दिल्ली अभी हवा में कलाबाजियां कर रही है। जहाँ देखो बस उसी का नाम, कुछ न्यूज़ चैनलों और रिपोर्टर की रोजी रोटी उसी से चल रही हैं  वरना अब तक तो वो कभी कटरीना की पतली कमर से आगे ही नही बढ़ पाते। कुछ लोग TRP के मोह माया में फंसे हुए हैं तो किसी को युगपुरुष जी के कदम क्रांतिकारी लगते।

 

जब से पार्टी ने चुनाव जीत कर सत्ता में आयी है भले ही वो कांग्रेस की बैसाखियों के सहारे 49 दिन हो या पूर्ण बहुमत की सरकार हो , कुछ न कुछ नया रोज मिलता ही है। खुद सरकार, सरकार के खिलाफ ही धरना देती है तो कभी जंतर मंतर पर तमाशा शुरू कर देती हैं। इसी सरकार ने देश को बताया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नही है और LG जैसा पद भी होता है बाकी तो सारे लोग सिर्फ LG को tv और फ्रिज के रूप में ही जानते थे। पता नही कैसे शीला दीक्षित ने 15 साल सरकार चला ली वो भी बिना LG से पंगे लिए।

 

बस्सी और जंग को फेमस करने में इन्होंने कोई कसर बाकी नही रखी, लगता हैं देश मे केवल एक ही कमिश्नर और उपराज्यपाल है, बाकी लोग तो सिर्फ राजभवन की सुविधाओं का आनंद ले रहे है। इतनी TRP तो करोड़ों रुपए खर्च करके आप को स्वयं को नही मिली, पहली बार पता चला कि मीटिंग में 9000 के समोसे तो 12000 की थालिया परोसी जाती हैं। शायद बिग बॉस की टीम ने उनसे संपर्क भी कर लिया होगा लेकिन जंग साहब ने अपने पहले प्यार  एकेडेमिक्स में ही जाना उचित समझा।

 

कुछ चीज़ें पहली बार भी हुई है, वैसे देश मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन जब रैली में कैमरे के सामने कोई पेड़ पर लटक जाए तो अंदर से आत्मा तक हिल जाती है, मुद्दा ये नही है कि किस ने उसे उकसाया या कहाँ पर और कैसे कोई चूक हुई है किंतु कब तक असंवेदनशील होकर नेता उसी मंच से भाषण दे रहे होते हैं। कुछ बाते यू भी समझ से परे हैं कि राजस्थान का किसान दिल्ली सरकार की रैली में आत्महत्या क्यो करेगा, प्रश्न बहुत उठते हैं पर शायद उनके जवाब नही है।

 

सत्ता के गुरुर में सबसे गलतियां होती है और जब आप नए होते है तो कुछ सेल्फ गोल तो कभी हिट विकेट हो जाते है, यही सब सर्जिकल स्ट्राइक के समय हुआ है, प्रश्न उठाना कतई गलत नहीं है लेकिन जब मुद्दा लोगो की भावनाओं से जुड़ा होता हैं तो आपका अलग थलग पड़ना तय है। कभी कभी किसी मुद्दे पर अपनी राय न देकर चुप रहने में ही समझदारी हैं क्योंकि वक्त की परतें कभी भी किसी को छुपा नहीं पाती हैं।

 

ऐसा नही है कि आप ने काम नहीं किया है, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में किये गए विकास पूरे देश के लिए अनुकरणीय है लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते हमेशा ही यह सारे कार्य छिपे रहे हैं। मोहल्ला क्लीनिक से ज्यादा मोदी की डिग्री के बारे में चर्चा रही तो शिक्षा विभाग के कार्य रोहित वेमुला की तरह सिस्टम के बलि चढ़ गए।

 

लोगो को जब आपसे बहुत ज्यादा उम्मीदे होती है तो आपको बहुत सावधानी से कार्य और नीति निर्माण के लिये सतर्क रहना चाहिए। एक पार्टी के नेता के रूप में आप कुछ भी बयान दे सकते हो लेकिन जब आपका आकलन आपके द्वारा किये गए कार्यो से होता हैं तब मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

(Image courtesy : ये चित्र delhi.gov.in से लिया गया है।)

( इस लेख के सारे विचार लेखक के है और किसी भी पार्टी या पार्टी के नेता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नही लिखा है, अगर किसी को कोई आपत्ति है तो अग्रिम माफी।)

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