EVM और राजनीतिक पार्टियां

आजकल सबसे ज्यादा चर्चा में अगर कोई है तो वो EVM ही हैं, किसानों और जवानों की शहादत से ज्यादा अगर राजनेताओं और पार्टियों को EVM यानि वोट की फिक्र है क्योंकि वो इतने अहंकारी हो चुके है कि ये मानने को तैयार ही नही है कि जनता ने उनको और उनकी पार्टी को सिरे से खारिज कर दिया है।

 

ये बवाल उत्तर प्रदेश के चुनावों के समय शुरू हुआ था जिसमे सपा, बसपा और काँग्रेस पार्टी की अप्रत्याशित हार हुई थी, जनता ने विकास को ना कहा तो गठबंधन को ना कहा तो बहनजी को ना कहा, कही दलित, तो कही सवर्ण, तो कही मुस्लिम सब ने अपने अपने राजनीतिक स्वार्थों के अनुसार वोटों को बांटने का काम किया, कही ध्रुवीकरण का चक्कर चलाया तो कही मुस्लिम कार्ड खेला गया। खैर छोड़ो, भारतीय राजनीति और चुनावो में ये आम बात हैं, जिसका समाधान सिर्फ और सिर्फ वोटर या जनता ही अपने स्वविवेक से कर सकती हैं।

 

जब उत्तर प्रदेश में एक पार्टी विशेष की सरकार बन जाती है तो इन सबको evm और इलेक्शन कमीशन में गड़बड़ी नजर आ जाती हैं, वो ये भूल जाते हैं कि 2007 और 2012 में भी चुनाव EVM से ही हुए है, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए किस हद तक गिरा जा सकता है , उसका कॉम्पिटिशन चल रहा है। सबसे ज्यादा हायतौबा तो नवी नवेली आम आदमी पार्टी कर रही हैं जो खुद 2014 में प्रचंड बहुमत से दिल्ली सरकार में EVM के द्वारा हुए चुनाव से आयी है। जिस सरकार से एक लोकपाल तो क्या शीला दीक्षित के टैंकर घोटाले को सामने लाने में लगभग 2 साल लग गए हो, वो सिर्फ 90 सेकंड में EVM हैक करने का दावा कर रही हैं वो भी पंजाब और MCD चुनाव में हार के बाद क्योंकि उनके लिए तो UP चुनाव हुआ ही नही है।

 

अपने पाप छुपाने के लिए जब आप इस तरह की ओछी हरकतो पर उतर आई हैं, जब उनका ही एक पूर्व मंत्री आपके मुख्यमंत्री के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है और ये जांच के नाम पर सदन में एक खिलौना EVM में हैकिंग करके अपने आप को तुर्रमखां समझ रहे हैं। कुछ लोग हर मुद्दे में टाँग अड़ा कर के सुर्खियां बटोरने में लगे हुए है, कही चुनाव वापस बैलट पेपर से करवाने की चुनौती दी जा रही है तो कही धरने प्रदर्शन करने की प्लानिंग।

 

नेता जो कभी अपने वार्ड या क्षेत्र से बाहर नही गए है वो जर्मनी और USA के रिपोर्ट के बारे में समझा रहे हैं, जिनकी दसवीं की रिपोर्ट कार्ड पर तो रेलवे में गैंगमैन तक की नौकरी नही लगती हैं। वो अपने आकाओं, हुक्मरानों या यूं कहें अपने पार्टी के दिग्गजों को खुश करने के लिए ऐसे बयान देते जा रहे हैं। जहाँ आम आदमी को इतनी गर्मी में पानी तक  नही मिल रहा है और ये इन्फ्लेशन रेट पर ज्ञान बांट रहे हैं।

 

ऐसा नही है कि EVM में तकनीकी खामियां नही हो सकती है लेकिन उसके लिए भारत मे इलेक्शन कमीशन , सुप्रीम कोर्ट और संविधान है जिनके नैतिक कर्तव्यों पर ही हमारा लोकतंत्र टीका हुआ है। जब 12 मई को सर्व दलीय मीटिंग में  इसका लाइव डेमो भी दिया जायेगा और अगर कही पर खामी आती हैं तो पूरी सरकारी मशीनरी उसको सही करने की कवायद में लग जायेगी।

 

यहां उम्मीद सिर्फ देश के नागरिकों से ही है क्योंकि वोट तो इन नेताओं ने न जाने किस किस तरह मांगे, कभी जाति के नाम पर तो कभी आरक्षण के नाम पर तो कभी बहू तो कभी सास के नाम पर। आप सचेत रहे, जब भी वोट देने का मौका मिले अपने स्वविवेक के आगे 2000 के चंद नोटों और शराब की बोतलों को न आने दे। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: