कही आप जिंदा तो नही हो !

आज यूँ ही नजरे झुकाकर चलने का मन कर रहा है,

क्योंकि कोई पूछ न ले अगले मोड़ पर की आप जिंदा तो नही हो।

 

सुनसान रास्तो में भी भीड़ का अहसास हो रहा है,

क्योंकि इस शून्य में ये समझ न ले की आप संवेदनशील तो नही हो ।

हर गली चौराहों पर पत्थरों से सामना हो रहा है,

क्योंकि कभी अन्तर्मन से आवाज न आ जाए की आप जिंदा तो नही हो।।

 

कभी शब्दो से तो कभी कड़ी निंदा का वार हो रहा है,

क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी लगने लगे की आप शर्मिंदा तो नही हो।

वक्त – बेवक्त तो कभी सोये हुए पर हमला हो रहा है,

क्योंकि कभी तिरंगा ही न पूछ लें की कही आप जिंदा तो नही हो।।

 

आसमान का उन मायूस आंखों से दीदार हो रहा है,

क्योंकि खाली खेत ये न बता दे की कही आप डरे-हारे तो नही हो।

रुके हुए, सहमे हुए क़दमो से सरोकार हो रहा है,

क्योंकि कभी रस्सी के फंदे ये न समझ ले कि आप जिंदा तो नही हो।।

 

टूटे हुए घरों और टूटे सपनों का आगाज हो रहा है,

क्योंकि कभी बैल मालिक से न पूछ लें कि आप थके तो नहीं हो।

खाली बर्तन और खाली पेट से शोर हो रहा है,

क्योंकि बैंक आत्मा बेचने के बाद न पूछ लें कि आप जिंदा तो नही हो।।

 

चारो तरफ अफ़वाहों का बाजार गर्म हो रहा है,

क्योंकि कही ट्वीट या पोस्ट न बता दे की आप रोबोट तो नही हो।

गाय के लिए, तो कही जिहाद के लिए कत्ले आम हो रहा हैं,

क्योंकि कोई मासूम का शव ने बतला दे कि आप जिंदा तो नही हो।।

 

कही गरीबों तो कभी दलितों के यहाँ खाना हो रहा है,

क्योंकि EVM कभी नही समझता की आप असमझ तो नही हो।

कभी अच्छे दिन तो कभी जूमलों  में नया इंडिया बन रहा हैं,

क्योंकि कही जंतर मंतर से आवाज न आ जाए कि आप जिंदा तो नही हो।।


Copyright © 2017 – Jagdish Jat

4 thoughts on “कही आप जिंदा तो नही हो !

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