Hindi Poem on Mother : मां की ममता, ये कब समझ आएगा 

Hindi Poem on Mother ( Mother’s Day Special)

 

हर वक्त उसकी सलाहें न जाने क्यों याद आ रही हैं,

मां कैसे ये सब कर लेती है, ये कब समझ आएगा।

 

उनका अंगुली पकड़ कर चलना सिखाना,

न जाने कब तक लड़खड़ाते क़दमो को संभाल गए।

उनके हाथों की मालिश और व्यायाम,

जॉनसन बेबी या हिमालय केअर या सरसो तेल में,

मां के हाथों का जादू, ये हमे कब समझ आएगा ।।


उनका रात को उठकर कंबल ओढाना,

न जाने कब एयर कूल्ड कमरों में तब्दील हो गए,

उनका सिर पर हाथ फिराकर या लॉरी गाकर सुलाना,

ये गानों का या उनके प्यार और ममता से लाड दुलार में,

मां के आचंल का असर, ये हमे कब समझ आएगा।।


उनका पहले दिन स्कूल छोड़ कर आना,

न जाने कब आफिस के चक्करों में व्यस्त हो गए,

उनका सुबह जल्दी उठकर टिफ़िन तैयार करना,

ये ब्रेड में या बिस्किट में या किसान कैच अप के स्वाद में,

मां के त्याग का प्रतिबिंब, ये हमे कब समझ आएगा।। 


उनके हाथ के पराठे और दही के साथ खाना,

न जाने कब होस्टल्स की रोटियों पर भारी हो गए।

उनके हाथ से बना अचार और मुरब्बा,

ये आंवले में दम था या आम के चंद टुकड़ो में,

मां के हाथों का स्वाद, ये हमे कब समझ आएगा ।।


उनका विदेश भेजेने के लिए पैकिंग करना,

न जाने कब हॉलिडे या बिज़नेस ट्रिप में परिवर्तित हो गए ।

उनके तीज त्योहारों में घर को सजाना,

ये रंगोलियों की खूबसूरती है या दीपक का उजाला,

मां के मन की कल्पना, ये हमे कब समझ आएगा ।।


उनका घर के दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठना,

न जाने कब दुनियादारी के चक्करों में उलझते चले गए,

लड़खड़ाते क़दमो और आवाज से फोन पर बाते करना,

ये अपने बच्चे के लिए प्यार या इंतजार की इंतहा में,

मां का मन और  ममता, ये हमे कब समझ आएगा ।।


Copyright © 2017 – Jagdish Jat

4 thoughts on “Hindi Poem on Mother : मां की ममता, ये कब समझ आएगा 

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