लानत है ऐसे विकास और समृद्धि पर !

लानत है ऐसे विकास और समृद्धि पर, 

जहाँ स्त्री और बड़े बुजुर्गों का सम्मान नही ।

गरीब और दलित जहां खून के आंसू रोये,
वो समाज, समाज कहलाने के लायक नही ।।

     

वो तमाशबीनों की अनगिनत टोलियां, 

जो हर बार हो रही मानवता के पतन पर शर्मसार नही ।

अंतिम संस्कार के लिए बेटो को बेचना पड़े,
वो खरीददार इंसान कहलाने के काबिल नही ।।

   

शर्म से झुक जाती है आंखे हमारी,

जब घर की बहू-बेटियाँ सूरज के उजाले में भी सुरक्षित नही।
उन हैवानों को मृत्युदंड से भी कड़ा दंड मिले,
जिनके कर्मो से स्वयं ईश्वर को भी अपनी कृति पर विश्वास नही।।

    

जब पढ़ने के लिए धरने पर बैठी लाडली,

आठ दिनों तक सरकार के कानों पर जूए रेंगती नही।

छेड़छाड़ के चक्करों से अब इनको मुक्ति मिले,
नही तो इस देश के सर्वनाश में कोई कसर अब बाकी नही।।

   

एक कुलदीपक को बचाने कूद पड़ा सारा जहाँ,

सारे कुतर्क और अन्याय एक सत्य के सामने टिकते नही ।
कब एक बेटी को गर्भ से बाहर निकलने का मौका मिले,
जो घर आंगन में खुशी बाटे और मायूसी उसके सामने टिकती नही ।।

  

जहाँ आम आदमी घर – दुकान पर भी सहमे डरे,

गुंडों और दबंगो के सामने इंसान की जान की भी कीमत नही।

न्याय के लिए बूढ़े मां-बाप और परिवार को अनशन पर बैठना पड़े,
भैंसों के लिए सरकारे लग जाये तो उनकी नाकामी भी अब अखरती नही।।

Copyright © 2017 – Jagdish Jat

5 thoughts on “लानत है ऐसे विकास और समृद्धि पर !

  • May 19, 2017 at 4:16 pm
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    मै भी सहमत हूँ आपके कहे इस कटु सत्य से —लानत है ऐसे विकास और समृद्धि पर,

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    • May 19, 2017 at 5:50 pm
      Permalink

      बिल्कुल जी, भले मोदी राज हो या योगी राज हो या सुशासन बाबू हो, जब तक एक आम आदमी को उसके मौलिक अधिकार नही मिल जाते, तब तक कागजो और आंकड़ों का विकास अधूरा है।

      Reply

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