Poem on love – प्यार का दर्द

Poem on love

प्रेम प्यार और स्नेह लता का,
कायल हु में उसकी अदा का ।
उसके प्यार में जीवन खोता हु,
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।

मझनु सा मैं पागल हु,

रांझा सा मैं गायल हु 
जी कर भी दुनिया छोड़ गया,
उससे जब नाता तोड़ गया । 
अब भी उसको भूल नहीं पाता हु,
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ  ।। 

उसकी याद सताए मुझको 

उसका प्यार मिटाए मुझको 
इतना प्यार है उससे मुझको,
उसकी याद में जागु यारों 
उसकी याद में सोता हु । 
अब भी उसकी याद में यारों 
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 

   

मैंने तो प्यार किया था तुझसे 

अपना जीवन वार दिया था तुझपे

वो तो मार गई थी मुझको पर, 
उसके वादों की ख़ातिर जीता हुँ
अपनी कसमों पर मरता हुँ । 
अब  भी उसकी याद में यारों 
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 

   

मेरे प्यार कि कहानी तुझ से 

है बर्बाद मेरी जवानी तुझ से ,
कैसे समझाऊँ यारों उसको 
कितना दर्द मिला प्यार में मुझको । 
उस दर्द में ही जीवन पाता हुँ 
अब भी उसकी याद में यारों ,
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 

 

( ये कविता प्यार का दर्द के हालातों को दर्शाती है और श्री सांवर मल ‘सन्नाटा’ के द्वारा लिखी गयी है, उनकी परमिशन के बाद इस ब्लॉग पर प्रकाशित की जा रही हैं, उनका साभार । )

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