गौरक्षक या जिहादी बनते जा रहे हो..

गौरक्षक या जिहादी बनते जा रहे हो  by Jagdish Jat

सब कुछ जानकर भी अनजान बन रहे हो,

आंखे होते हुए भी अंधभक्त बन रहे हो।


कभी हटाकर देखो अपनी भक्ति का चश्मा,

शायद नंगी आंखों से सत्य देखने को मिल जाए।

बुद्धिमत्ता के झूठे रंग में रंगते जा रहे हो,

ज्ञान होते हुए भी मंदबुद्धि बन रहे हो।।


चारो तरफ दरिंदगी का साया मंडरा रहा है,

नैतिकता एवं सयंम कही खोने लग जाए ।

फिर भी मानव कहलाने पर गर्व कर रहे हो,

मानवता होते हुए भी दानव बन रहे हो।।


हर जगह खौफ और डर अपने चरम पर है,

गाय और जिहाद जिंदगियों पर भारी हो जाए ।

गौ-रक्षक और जिहादी बनते जा रहे हो,

ईश्वर को खुश करने के लिए गले काटे जा रहे हो।।


विचारधारा का कट्टरवाद समझ से परे है,

किसी के लेख या विचार से भावनाए आहत हो जाए ।

ट्वीट या पोस्ट से अफवाह फैलाते जा रहे हो,

पता नही किस हक से लोगों को पीटते जा रहे हो।।



हिंसा और पत्थरों के सहारे मांगे मनवा रहे है,

किसी अलगाववादी के बहलाने पर वहम हो जाए।

स्कूलों को जलाकर आजादी की मांग कर रहे हो,

आंतकवादी के मरने पर जुलूस निकाले जा रहे हो।।


सब कुछ जानकर भी अनजान बन रहे हो,

आंखे होते हुए भी अंधभक्त बन रहे हो।।


Copyright © 2017 – Jagdish Jat

2 thoughts on “गौरक्षक या जिहादी बनते जा रहे हो..

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