Hindi Poem : एक रंग के खून के भी हज़ारो नाम हो गए….

Hindi Poem : Samaj ki samsyao ke upar by Jagdish Jat

 

कभी ब्राह्मण हुए तो कभी राजपूत हो गए,

दहेज और शान ओ शौक़त में घर के घर डूब गए।

गौरवशाली इतिहास और वहम के बोझ तले,

वर्तमान में अपने अस्तित्व को बचाने के लाले पड़ गए ।।


कभी जाट हुए तो कभी गुर्जर हो गए,

बाल विवाह और मृत्युभोज के चक्करों में उलझ गए।

घर और जमीनें बेचकर सभी सड़क पर आ गए,

अशिक्षा और गरीबी के चलते पलायन को मजबूर हो गए।।

    

कभी हरिजन हुए तो कभी दलित हो गए,

वोट और राजनीति के खातिर नेताओं के मोहरें बन गए।

आज भी दो वक्त की रोटी पाना जीवन के लक्ष्य बन गए

अपमान और तिरस्कार से संघर्ष करते पीढ़ी दर पीढ़ी गुजर गए।।


कभी पाटील हुए तो कभी पाटीदार हो गए,

आरक्षण के चक्करों में युवावों के भविष्य तबाह हो गए ।

बेरोजगारी की जंजीरों में जकड़ते चले गए,

मेहनत छोड़ कर नेताओं की कठपुतली बन गए ।।


कभी शिया हुए तो कभी सुन्नी  हो गए,

अपने को दूसरे से बड़ा बताने में मशगूल हो गए।

जिहाद और कट्टरवाद के दंश झेलने को मजबूर हो गए,

आगे बढ़ने के इरादों में रूढ़िवादिता की बेड़िया लगाने लग गए ।।

   

कभी श्वेतांबर हुए तो कभी दिगम्बर हो गए,

बेटों की चाहत में बेटियों को भूलना शुरू कर गए।

संयम और अहिंसा तो किताबों में सिमट गए,

स्वार्थ और लालच में कुटुंब के पर कतरने लग गए ।।


कभी सिख हुए तो कभी फारसी हो गए,

कभी बुद्धिजीवी तो कभी परदेशी होते गए।

ड्रग्स न जाने कितनी जिंदगी तबाह करते गए,

शराब और नशे के चक्करों में परिवार बिखरते गए ।।


एक रंग के खून के भी हज़ारो नाम हो गए,

कभी चमड़ी के काले तो कभी गोरे रंग के हो लिए।

अहम और अपने वर्चस्व को बनाने के लिए,

एक इंसान और सिर्फ इंसान बनना भूल गए।।


वहम में जीते जीते सच्चाई ही भूल गए,

खुद्दारी की जगह चमचागीरी को अपना लिये।

स्वाभिमान और मानवता तो दूर की कौड़ी हो गए,

दो गज जमीन के लिए बॉर्डर पर लकीरे खींच दिए।।


धर्म ग्रंथों के ज्ञान पर लोगो के मत हावी हो गए,

विचारधाराओं की बाढ़ में स्वयं ईश्वर भी खोने लग गए।

फ़तवों और फ़रमान ईश्वर से ऊपर बनने शुरू हो गए,

जन्नत में हुर्रे पाने के लिए जमीन पर मानवता के दुश्मन बन गए ।।

   

    

Note : ये कविता किसी भी धर्म या समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नही लिखी है तथा सारी बाते समाज में बसी बुराइयों के बारे कटाक्ष करती है।

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