​Freedom of Speech : अभिव्यक्ति की आज़ादी ने होती तो क्या होता ?

​​Freedom of Speech 

 

अभिव्यक्ति की आज़ादी ने होती तो क्या होता ?

 

कोई भी भारत में कश्मीर की आज़ादी के नारे नही लगा पाता,

कोई बुद्धिमत्ता के नाम पर अपनी राय नही थोप पाता।

भटके हुए युवाओं के हाथ रोजगार की जगह पत्थर नही आ पाते,

युवां अहसान-फरामोश अलगाववादीयों के बहकावे में न आते ।।

    

दलित के ऊपर अन्याय या शोषण नही कर पाते,

वोट बैंक से बढ़कर आज विकास में सहभागी बन जाते ।

घर पर आकर नेताओ को होटल के खाने को नही खाना पड़ता,

कोई भीम आर्मी सवर्णों के बहू बेटियों पर ललकार नही पाता ।।

   

गौ रक्षा किसी धर्म या समुदायों से नही जुड़ पाता,

यहाँ कानूनों की जगह है संस्कारों से काम चल जाता।

कोई लेफ्ट या साउथ खाने के नाम पर गौहत्या नही कर पाते,

कोई राइट या नार्थ गौहत्या के नाम पर मनुष्य को न मार पाते ।।

    

असहिष्णुता के नाम पर अवार्ड नही लौटाये जाते,

मानवाधिकारों के नाम पर बखेड़ा खड़ा नही किया जाता।

भले ही विचारों से असहमत होते लेकिन विचार सुनने पड़ते,

बुद्धिजीवियों की बुद्धिमत्ता के गुणगान गाये जाते ।।

    

वंदे मातरम और राष्टगान के लिए ऑर्डर नही बनता,

देशभक्ति के लिए किसी से सर्टिफिकेट नही लेना पड़ता।

राष्ट्र निर्माण के कार्यों के लिये विदेशी मुद्रा नही लानी पड़ती,

कोई देश आंख उठाकर देख उतनी उनकी क़ुव्वत नही होती।।  

 

Note : ये कविता किसी भी धर्म या समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नही लिखी है तथा सारी बाते समाज में बसी बुराइयों के बारे कटाक्ष करती है।

Copyright © 2017 – Jagdish Jat

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