Gau Hatya : बुद्धिजीवी गायों ने की अवार्ड वापसी की घोषणा 

लगातार गायों पर बढ़ रहे हमलों के बाद कुछ बुद्धिजीवी गायों ने आवर्ड वापसी की घोषणा कर दी है जिससे सारे गौ समाज मे हड़कंप मच गया है।

 

सारे न्यूज़ चैनल और मीडिया पर्सन ऐसी गायों के तबेले के बाहर डेरा लगा के गायों के गोबर करने की प्रक्रिया को खत्म होने का इंतजार कर रहे है जिसके बाद वो अपने चैनलों पर जी भरकर गोबर कर सके।

 

जब हमारे सूत्रों ने आजमगढ़ दुग्ध रत्न अवार्डी गाय से बात करने की कोशिश की तो उसके अनुसार “देखिए ये पूरे गौ समाज के लिए बहुत ही खतरनाक दौर है जहां पर लोग पूरे दिन गौ माता के बारे में चिल्लाते है और शाम को वो ही लोग घर पर बीफ पार्टी का आयोजन करते है। असहिष्णुता बहुत बढ़ गयी है , अब भारत देश हमारे रहने लायक नही बचा है , कोई और हमें पाकिस्तान भेजेने के बारे में बोले उससे पहले ही हम युगांडा चले जायेंगे। ” कहतें कहतें रंभाने के साथ ही हमारे कैमरा पर्सन के पेंट पर गोबर कर दिया।

 

इसी के साथ दुग्ध-साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित दूसरी गाय ने भी पूछ झटकते हुए कहा-” हालात इतने खराब हो चुके है जितने तो सीरिया और यमन में नही है, पहली बार हम हमारे अस्तित्व  के लिए लड़ रहे है। सब कुछ सामान्य चल रहा था कोई हमे मां की तरह पूज रहा था तो कोई हमारी गर्दन काट रहा था लेकिन अब तो विरोध प्रदर्शन में भी हमारी हत्या होने लग गयी है। लोग अपने घर बार छोड़ कर लोगो को पीटने में व्यस्त है तो कोई हमारी गर्दन काटने में। सब अपने स्वार्थ के चलते लगे हाथों मेरा कल्याण कर रहे हैं।” गुस्से में अपने अवार्ड के तमगे को हमारे सूत्रों के मुहँ पर दे मारा, जैसे तैसे हमारे सूत्र इस हमले से बच कर फरार होने की फिराक में हैं।

 

भागते भागते एक और गाय ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे दी, “देखो भईया हमारे से अच्छी तो बाबा आज़म की भैंसों की हालत है जिनके घूम हो जाने में ही सारा महकमा लग जाता है, हमारी हालत दलितों के समान है जैसे उनको वोट के बाद छोड़ देते है ठीक वैसे ही हमें भी दूध पीकर घर या तबेले से बाहर निकाल दिया जाता हैं।”

 

अंदरूनी खबरों के अनुसार सारी गाये जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए जा रही है जहां पर कुछ मनुष्य रूपी जानवर भी उनका साथ देंगे । कुछ चैंनल अपनी स्क्रीन काली करेंगे तो कुछ प्राइम टाइम में सार्थक बहस करने की कोशिश करेंगे , कुछ गीतकारों ने अनपढ़ गायों को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल न करने का आग्रह किया है तो कुछ ने जनमत संग्रह की बात को जोर शोर से उठाने की वकालत की।

 

इस पहल से अंतरराष्ट्रीय जगत में भी सनसनी फैल गयी है, खासकर पाकिस्तानी समाजसेवियों मे, जो कश्मीर में अमन चैन के लिए भरसक प्रयास कर रहे है। उनके नए प्लान के अनुसार अब भारत मे लोगो को मारने की जगह गाय को मारकर शांति फैलाने का प्रयास किया जायेगा।  rdx और विस्फोटक सामग्री की बढ़ती क़ीमतों एवम वहां की सरकार को मिलने वाली भीख में भारी कमी के चलते यह सस्ता लेकिन परमाणु बम से भी ज्यादा कारगर उपाय पर काम किया जा रहा है। समाजसेवियों के इस कदम से सीमापार टहलने के लिए आने वाले खुदा के फरिश्तों की संख्या में भी भारी कमी देखने को मिल रही है ।

 

जब हमने तबेले की अन्य गायों और बैलों से बात करने की कोशिश की तो कई रहस्यमयी राज़ सामने आए । तबेले की विजिटर बुक में कई नामी गिरामी हस्तियों के नाम सामने आए जो यहा तथाकथित छुट्टी मनाने के बहाने गोबर करने की कलां सीखने आये है। कुछ तो इस तबेले के आजीवन सदस्य है जो हर मुद्दे पर अपनी टाँग घुसेड़ने एवं रायता फेलाने के लिए जग प्रसिद्ध है। यहाँ अक्सर लोग आते है जब उनकी बुद्धि का घास चरने का शौक चढ़ता है जिससे कि उनके दिमाग के साथ मन को भी शांति मिल सके।

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