Hindi Poem : सहूलियत के आधार पर भगवान बनाये जा रहे है

सहूलियत के आधार पर भगवान बनाये जा रहे है,
कभी 1 रुपये तो कभी करोड़ का मुकुट चढ़ा रहे हैं।
दो वक्त की रोटी के लिए किसान भूखे मर रहे है,
लेकिन पूजाओं में छप्पन भोग लगाएं जा रहे हैं।।

गर्मियों में AC के इंतजाम किए जा रहे है,
कही पर कूलर तो कही दूध से नहलाये जा रहे है ।
तपती जेठ की दुपहरी में भी खेत खोदे जा रहे है,
लेकिन दिन में चार चार बार अभिषेक किये जा रहे हैं।।

कही अखंड ज्योति जलाये जा रहे है,
कही प्रतिमाओं को फूलों से सजाए जा रहे है ।
कोई अंधेरे घरों में रहने को मजबूर हो रहे है,
लेकिन पाप मिटाने के लिए तेल के डिब्बे चढ़ाये जा रहे है।।

कही शोभायात्रा निकाले जा रहे है,
कही झांकियों की झलकियां दिखाते जा रहे है ।
कही बूढ़े कंधे जवान बेटों की अर्थियां ढो रहे है,
लेकिन रथयात्राओं में लोगों के हुजूम उमड़ते जा रहे है।।

कही अदभुत सिक्योरिटी लगाए जा रहे है,
कही सीसीटीवी तो कही गार्ड बिठाए जा रहे है ।
कही हक मांगने पर गोलीयां मारे जा रहे है,
लेकिन खजानों के लिए व्यवस्थाएं किये जा रहे है।।

विशिष्ट लोगों के लिए नियम बदल जा रहे है,
कही काउंटर तो कही आस्था का शिकार बन रहे है।
कही किसानों का दमन और शोषण किये जा रहे हैं,
लेकिन सिर झुकाकर ईश्वर को पागल बनाये जा रहे है।।

सहूलियत के आधार पर भगवान बनाये जा रहे है।।

Note : ये कविता किसी भी धर्म या समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नही लिखी है तथा सारी बाते समाज में बसी बुराइयों के बारे कटाक्ष करती है।

Copyright © 2017 – Jagdish Jat

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