Motivational Stories : कैसे इस आदमी ने करोड़ो के घाटे से उबर कर बिलियन डॉलर कंपनी बनाई

Motivational Stories : इस सीरीज के अंतर्गत हम ऐसे लोगो, ग्रुप्स या कम्पनीज के बारे में बताएँगे जिन्होंने अपने क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित किये है ।

अपने व्यापार में हो रहे घाटे और मुनाफ़े में भारी कमी के साथ जब कंपनी बेचने के हालात हो जाये तब इंसान अपने आत्मविश्वास के साथ ही अथक प्रयास एवं मेहनत से आगे बढ़ सकता है और अपने बड़े बुजुर्गों के अनुभव एवं आशीर्वाद से जीवन की कई मुसीबते टल जाती है, ऐसी ही कहानी है हरि मोहन बांगड़  की जिन्होंने कर्ज़े में चल रही श्री सीमेंट कंपनी को न केवल संकट से उबारा बल्कि 6 बिलियन डॉलर नेट वर्थ वाला एक बिज़नेस ग्रुप बना दिया जो सीमेंट मार्केट में एक मजबूत हिस्सेदार बन गया है । आज श्री सीमेंट ग्रुप के पास श्री, बांगड़ और रॉकस्ट्रांग नाम के तीन बड़े सीमेंट ब्रांड है जो न केवल उत्तर भारत बल्कि पुरे देश के साथ ही विदेशों में भी निर्यात हो रहे है ।

जब भी कभी बिज़नेस की बात आती है तो मारवाड़ी और गुजराती परिवारों का नाम सबसे आगे रहता है, चाहे वो टाटा परिवार हो या बिड़ला, इन सब ने व्यापार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किये है तथा पीढ़ी दर पीढ़ी वो इस क्षेत्र में नए अवसर और रिकॉर्ड स्थापित कर रहे है।

आज इसी कड़ी में हम एक मारवाड़ी परिवार के बारे में बात करते है जिन्होंने अपने व्यापार को अपनी मेहनत और कुशलता से नई दिशा दी है, पिता – पुत्र की जोड़ी का नाम है हरि मोहन बांगड़ और उनके पिता बेनु गोपाल बांगड़ जो B G Bangur के नाम से भी जाने जाते है। अभी इनकी उम्र अभी 86 वर्ष है और 6.3 बिलियन डॉलर के मालिक है ।

संघर्ष का दौर

इन्होंने विगत कुछ वर्षों में कई चुनौतियों का सामना किया है जिसमे मार्केट में चल रही मंदी में अपने सीमेंट व्यापार में मुनाफे को बनाये रखना एवम मौजूदा दौर में बने रहने के लिए सीमेंट उत्पादन में नए तकनीक का प्रयोग करना । इसके साथ ही नए ब्रांड्स का विकास करना भी एक बड़ा चैलेंज था।

बांगड़ सीमेंट अपनी क्षमता को दोहरा करने की महत्वाकांक्षी योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अब तक कंपनी उत्तर भारत तक ही सीमित थी लेकिन अब छत्तीसगढ़ में दो इकाइयां स्थापित करने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

लगभग 15 साल पहले, बांगड़ परिवार को राजस्थान के ब्यावर जिले में दो सीमेंट संयंत्र चलाने में कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था। यह समय सन 2002 था, जब सीमेंट बाजार चार साल की मंदी के दौर से गुजर रहा था और अपने अतिरिक्त क्षमता वाले श्री सीमेंट एवं उनकी ग्रुप की अन्य कंपनी शायद ही कोई मुनाफ़ा कमा रही थी। अपनी इन्ही समस्याओं से निपटने के लिए तथा अपनी कंपनी के विस्तार के लिए लगभग अपनी कंपनी के कुल वैल्यू का 1 9% धन मार्केट से उधार लिया था।

कंपनी में चल रही इन वित्तिय दिक्कतों से प्रबंध निदेशक हरि मोहन बांगड़ परेशान हो गए और एक संभावित खरीदार की तलाश करने का फैसला किया। इनकी यह खोज फ्रांसीसी सीमेंट उद्योग की प्रमुख कंपनी Vicat के रूप में हुई। Vicat कंपनी भी भारतीय बाजार में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही थी और उनको तलाश एक ऐसे पार्टनर की थी जो भारतीय सीमेंट उद्योग को अच्छी तरह से समझता हो, ये मौका बांगड़ परिवार नही चूकना चाहते थे और उन्होंने अपने कंपनी के 800 करोड़ के वैल्यू पर 50-50 साझेदारी का निर्णय ले लिया । Vicat जहां भारतीय मार्केट में अपने पैर जमाना चाहती थी तो बांगड़ परिवार को अपने कर्ज़े को चुकाना था। इस समय यह निर्णय दोनों ही कंपनियों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता था। दोनों कंपनियों के वकील जरूरी कागजात तैयार कर चुके थे और अगले दिन सुबह 9 बजे सौदे पर हस्ताक्षर करने थे, वो रात बांगड़ परिवार के लिए बहुत ही मुश्किल और उम्मीदों भरी थी।

इस मुश्किल परिस्थिति में हरि मोहन बांगड़ अपने पिता बेनू गोपाल (बीजी) के पास गए तो उन्होंने कंपनी में चल रही सारी चीज़ों को सही करने और बदलने का मौका ढूढ़ने के लिए कहा और उनके अनुसार अगर सब कुछ अगले 2 वर्ष में अच्छा नही भी रहा तो भी वो कोई न कोई नया खरीददार ढूंढ ही लेंगे तो एक और प्रयत्न करने में कोई बुराई नही है। 

  

उन्होंने अपने बेटे पर भरोसा जताते हुए कहा कि “मेरा जीवन खत्म हो गया है, यह आपके लिए यह निर्णय लेने के लेने का उचित समय है। ” पिता से मिले हौसले के बाद उन्होंने Vicat के साथ होने वाली डील को रद्द कर दिया और नए सिरे से कंपनी का कायाकल्प करने के लिए जुट गए। Vicat के बार बार पैसे बढ़ाने पर भी यह डील उनके आत्मविश्वास के सामने नही टिक सकी।

मेहनत के बाद सुनहरा दौर

एक दशक बाद, श्री सीमेंट 10 गुना उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ अपने क्षेत्र में मजबूती से मार्केट में अपने आप को स्थापित कर चुकी है। इसी बीच Vicat को आंध्रप्रदेश स्थित सागर सीमेंट्स के साथ डील करना पड़ा है जो श्री सीमेंट के 13.5 मिलियन टन की तुलना में सालाना 2.35 मिलियन टन का उत्पादन ही करता है।

  
श्री सीमेंट ने अपना शेयर 45 रुपये से दस साल में 4500 रुपये तक बढ़ाया है और आज यह 4,800 रुपये हो गया है। साधारण शब्दों में: 1 9 85 में श्री सीमेंट्स में निवेश किए गए 1 रुपया 28.5 प्रतिशत की दर से प्रतिवर्ष बढ़ता गया है। इसने बीजी बांगड़ को फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट पर 6 अरब डॉलर के टॉप 15 में शामिल कर लिया है।

इसी बीच सारे एनालिस्ट के लिए यह मुश्किल सवाल यह है कि श्री सीमेंट की सफलता के पीछे क्या कारण है जिससे कि एक बार उसको मार्केट में खरीदने के लिए कोई तैयार ही नही था लेकिन आज यह कंपनी हर वर्ष सफलता के झंडे गाड़ रही है। इनके मुख्य कारण देखे तो

  1. एक वजह यह भी है कि 2002 के बाद पूरा सीमेंट उद्योग बदल गया है , जहां नई तकनीक के साथ उच्च क्वालिटी की सीमेंट बन रही है वही घरेलू मार्किट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट के लिए तेजी से मांग बनी हुई है।
  2. इन्ही पहलुओं को ध्यान में रखते हुए IIT मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हरि मोहन बांगड़ ने अपने प्लांट्स में सबसे पहले आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया 
  3. साथ ही आक्रामक मार्केटिंग नीति भी तय की है जिसके परिणाम अब लगभग एक दशक के बाद भी देखने को मिल रहे है  तथा कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है
  4. उन्होंने सभी अधिकारियों को स्वतंत्र प्रभार दिया जिससे की उनमें निर्णय लेने की क्षमता का विकास हुआ साथ ही महत्वपूर्ण निर्णय में होने वाली देरी को भी एक तरह से खत्म कर दिया।

 

सीखने योग्य बातें

इस बांगड़ सीमेंट ग्रुप के सफर से कई वास्तविक अनुभव निकल कर आये है जिन्हें अपने जीवन मे आत्मसात कर सकते है। सबसे महत्वपूर्ण बात सीखने को जो मिलती है वो अंत तक लड़ते रहना और कितनी भी विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानना । हम भी शरुआती विफलताओं से घबरा कर अपना कार्य बीच मे ही छोड़ देते है जिससे हमारा सारा किया गया कार्य व्यर्थ हो जाता है। हमें अंत तक लड़ना चाहिए और हमेशा विफलता के बाद भी एक और प्रयास के लिए अपने आप को मानसिक रूप से तैयार रखना चाहिए। 

 

बांगड़ परिवार या श्री सीमेंट ग्रुप से एक बात सीखने को मिलती है वो है ‘ मन के जीते जीत और मन के हारे हार’ ।

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