किसान – तू है बड़ा महान

कर रहा है तू परिश्रम है, 
तू ही इस धरती की शान 
हे किसान - तू बड़ा महान ॥ 


तेरे ही परिश्रम से है, धरती का श्रृंगार 
तु ही रह गया है , इस भूमि का आधार 
अपनी मेहनत और लगन से 
बंजर भूमि में भी लगा डाला तूने उद्यान
हे किसान - तू बड़ा महान ॥ 

  
करता है तू मेहनत , उगाता है तू अनाज 
फिर भी नहीं रहा आज ,तुझ पर किसी को नाज 
ओरों के लिए करता सब कुछ, तेरे लिए किसी ने नहीं किया कुछ 
ये कैसी विडम्बना है भगवान
हे किसान - तू बड़ा महान ॥ 

  
तू है इस भुमि का पुत्र, फिर भी नहीं सुनी तेरी किसी ने पुकार 
कब तक दबा रहेगा कर्ज में, कब तक सहेगा नेताओं का अत्याचार 
अब उठा के हथियार, बन जा तू सीमा का जवान 
हे जवान तू बड़ा महान ॥ 

 
कोंग्रेस हो बीजेपी हो या हो कोई सरकार 
तुझ पर होता रहा अत्याचार,
तुने बनाया सबको अमीर इन्होंने तुझ ही बना डाला गरीब 
कर तु भी कुछ ऐसा, बहुत हो गया अब न रह नादान
हे किसान तू बड़ा महान ॥ 

 
अब भी तू नहीं जगा तो, डुबो देगी तुझको ये महंगाई 
फिर कैसे कर पायेगा तू अपनी ही बेटी की विदाई 
सुनो "सँवार मल सन्नाटा" की, जय जवान जय किसान 
हे किसान तू बड़ा महान ॥

( ये कविता देश के किसानों के हालातों को दर्शाती है और श्री सांवर मल ‘सन्नाटा’ के द्वारा लिखी गयी है, उनकी परमिशन के बाद इस ब्लॉग पर प्रकाशित की जा रही हैं, उनका साभार । )

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