हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात है।

​नेताओं के सामने किसी की क्या बिसात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात है।


कभी घोटाले भी आदर्श हुए तो,

कभी कोयले से कालिख पोत गए,

कभी दवाइयों को ले उड़े तो ,

कभी गायों के चारे तक को खा गए।

बुड़बक के सामने किसके टिकने की औक़ात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात हैं।


कभी घोटाले भी कॉमनवेल्थ हो चले तो,

कभी खेलों में भी अपना खेल दिखा गए,

कभी ब्रिज भी हवा में उड़ चले तो,

कभी लाखों के पंखे और टॉवेल आ गए।

कलमाड़ी का खेल भी खिलाड़ीयों पर आघात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात हैं।


कभी घोटाले भी 2G और 3G  हुए तो,

कभी तरंगों को भी बांटने में अपना हुनर दिखा गए,

कभी अपनों को रेवड़ीयां बाटी तो

कभी G के दौर में 3G के सपने दिखा गए।

वो राजा और कनिमोझी की भी क्या सौगात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात हैं।


कभी घोटाले भी देशभक्ति से ऊपर हुए तो,

कभी तोपों की भी स्वार्थ हेतू नीलाम कर गए,

कभी गोलियों की दलाली की गई तो

कभी बोफोर्स तो कभी मिग में घपले कर दिए।

सैनिको का साहस और पराक्रम भी जज्बात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात है।


कभी घोटाले भी जमीन पर हुए तो,

कभी चमचागिरी में जमीन के टुकड़ों को बांट गए,

कभी ऑडी में घूमने वाले किसान बन गए तो,

कभी कौड़ियों के दाम लाखों की जमीन लूटते गए।

दामादजी के सामने तो कानून भी खैरात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात हैं।


कभी घोटाले भी लाइलाज हो गए तो,

कभी पोलियो तो कभी कुष्ठ की दवा निगल गए,

कभी NRHM अभियान भी भेंट चढ़ गए तो,

कभी जच्चा बच्चा को नकली घी और टिके लगाते गए,

बहनजी के सामने तो विरोधीयों की क्या बिसात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात है।


कभी घोटाले भी व्यापमं हो गए तो,

कभी पैसों के दम पर सरकारी बाबू बन गए,

कभी दसवीं फैल डॉक्टर बन गए तो,

कभी द्वेष के मारे लोग काल के ग्रास बन गए,

सरकारी तंत्र की धज्जियां उखाड़ना आम बात है,

हर घोटाले के बाद निकले वाह क्या बात हैं।

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