समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं

क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं,

हर बार स्वयं को बचाने बहानों की बाढ़ आ जाती हैं,
सौ बार झूठ की भाषा भी सत्य को छुपा नही पाती हैं।
वक़्त की कारीगरी इंसाँ को कहाँ समझ आ पाती हैं
क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं।।

 

आलस्य की अनगिनत बानगियाँ सामने आ जाती हैं,
अपने दुश्मन की समय रहते पहचान कहाँ हो पाती हैं।
जीवन में अनुशासन की बात कहाँ समझ आ पाती हैं,
क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं ।।

 

सब को टालना आदत से ज़्यादा मजबूरी बन जाती हैं,
कड़ी मेहनत भी लापरवाही के सामने कहाँ टिक पाती हैं।
असफलता की कड़ी सच्चाई कहाँ समझ आ पाती हैं,
क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं ।।

 

यह भी पढ़े : अन्धभक्ति और श्रद्धा में क्यों उमड़ें लाखों हज़ार

 

ख़्वाबों के पुलिंदो से पूरी ज़िंदगी कहा गुज़र पाती हैं,
सफलता भी पसीने की बूँदों का नज़राना माँगती हैं ।
संघर्ष में अथक प्रयास की बानगी कहाँ समझ आ पाती हैं
क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं।।

 

स्वयं से ईमानदार बनने में अलग ही ख़ूबसूरती होती है,
अनुशासन से मेहनत भी अपने मुक़ाम को पा ही लेती है।
वक़्त की कारगुज़ारी कब आसानी से समझ आ पाती है,
क्यों समय रहते समय की क़ीमत समझ नही आती हैं ।।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: