जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं

जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं,
शाम का अँधेरा भी हीरे की तरह चमक उठता हैं ।
हर बार अर्जुन की तरह सिर्फ़ आँख ही देख पता हैं,
अपने कर्म से डगर पार करने का हौसला आ जाता हैं ।।

पसीने की बूँदों से नई इबारत लिख जाता हैं,
विफलता को भी मिट्टी में मिला दिया जाता हैं ।
इन शूरवीरों का इतिहास भी गवाह बन जाता हैं,
जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं ।।

नित नई बाधाओं से निपटना भी आ जाता हैं,
जब निरंतर कड़ी मेहनत का मंत्र दोहराया जाता हैं ।
लक्ष्य मज़बूत इरादों के सामने कहाँ टिक पता हैं,
जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता है ।।

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लोगों की आलोचनाओं से कहाँ रुका जाता हैं,
जब ख़ुद पर विश्वास खुदा से भी ज़्यादा होता हैं।
ठोकरें ख़ाने के बाद ही तो परिणाम आ पाता हैं,
जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं ।।

आधे रास्ते रुकने वालों को लक्ष्य कहाँ मिल पाता हैं,
राहों पर चला राही कब सीधे रास्तों पर गुज़र पाता हैं ।
मुसीबतों के पहाड़ से अमृतरूपी गंगा निकाल पाता हैं,
जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं ।।

असफलता के बाद फिर अनुशासन से लग जाता है,
हार के लिए बहाने ढूँढने में समय कहाँ खों पाता हैं ।
बिन बोलें सफलता के शोर से सब बता दिया जाता हैं,
जब सफलता का जूनून सर पर चढ़कर बोलता हैं ।।

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