स्वर्ग जहाँ रहती हँसी की फ़ूलवारीयाँ

घर का आँगन,

फूलों की क्यारियाँ,

तुलसी का पौधा ,

चलती ठण्डी पुरवाईयाँ

टूटी-फूटीं ईंटों का फ़र्श

नन्ही सी घास की डालियाँ

स्वर्ग जहाँ रहती हँसी की फुलवारियाँ

 

बरामदे की पट्टियाँ,

सीढ़ी की ऊँची – नीची ईंटों की क़तारें

तराशी हुई दरवाज़े की लकड़ियाँ

चूने से पूती हुई दीवारें

खुली हुई खिड़कियाँ

वो टेढ़ी-मेढ़ी कच्ची सड़क

विश्वास होता है नींव की बुनियाद

 

पीपल का पेड़

कोयल की कुहुँ – कुहुँ

माटी से बना चबूतरा

फटीं-कटी दरिया

चेहरे पर पड़ी झुर्रियाँ

हुक्के का गुड़गुड

अन्याय पर न्याय की विजय

 

खेतों में खड़ी फ़सल

कलकल बहता पानी

चारे की गठरी

कच्ची मूँगफली

बैलों की घण्टी की खनखन

पसीने की बूँदे

सबका पेट भरता अन्नदाता

 

हँसी – ठिठोली की अनगिनत दास्ताँ

गायों को चराना, इमली का दाना

आम की गुठली , बेरों की खटाईं

चोर -पूलिस के साथ छूपम-छुपाई

दादी-नानी की कहानियाँ

खण्डहर की चुड़ैल

बचपन की नायाब यादें

 

होलीं की पिचकारी

दीपावली की मिठाई

नए कपड़े और पटाखे

सावन के झूलें

जागरण के भजन

त्योहारों की चहल पहल

सब में बँटता प्रसाद और ख़ुशियाँ

 

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