कैसे दोस्तों ने 2009 के मंदी के दौर में नौकरी खोने के बाद विदेश में करोड़ो के टर्नओवर वाली कंपनी खड़ी कर दी

Motivational Stories : इस सीरीज के अंतर्गत हम ऐसे लोगो, ग्रुप्स या कम्पनीज के बारे में बताएँगे जिन्होंने अपने क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित किये है ।  आज हम बात कर रहे है  Shree Krishna Vada Pav की  ।

 

2009 के मंदी के दौर में बहुत नौकरीपेशा लोगो ने अपनी नौकरियां खोई थी, जो लोग भारत में थे उनको उनके परिवार से मदद मिल गयी लेकिन जो लोग विदेशों में नौकरी कर रहे थे , उनके लिए अब विदेश में रहना काफी मुश्किल काम हो गया था ।
 
ऐसी ही कहानी है सुजय सोहनी की, मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकले और अपनी कड़ी मेहनत से लंदन में जॉब पाने वाले सुजय की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है । 2009 के मंदी के दौर में उनको भी अपनी अच्छी खासी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस मुसीबत के समय में वो बहुत ही तनावग्रस्त रहने लगे क्योंकि लंदन में दैनिक दिनचर्या के लिए भी उनके पास पैसे कम पड़ने लग गए । वो भारत वापस लौटने का मन बना चुके थे लेकिन उनके एक दोस्त के साथ हुई बातचीत ने उनके जीवन में उम्मीद की नयी किरण जगा दी।



 

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सुजय पहले लंदन के एक पांच सितारा होटल में भोजन और पेय प्रबंधक के रूप में काम कर रहे थे। सुबोध जोशी 1990 में उनके सहपाठी थे, जब वे मुंबई के रिजवी कॉलेज, में पढ़ रहे थे। दोनों के बीच नौकरी के दौरान भी वर्षों से संपर्क था ।
 
मुसीबत के समय में जब सुजय ने सुबोध से कहा कि ” इस मंदी कि दौर ने उनको इतना आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया कि एक वड़ा पाव खरीदने कि भी पैसे उनके पास नहीं बचे है ।” इस बातचीत के अंत में उन्होंने लंदन में ही वड़ा पाव बेचने का प्लान बनाया तथा श्री कृष्णा वड़ा पाव नाम से एक वेंचर खोलने का प्लान बनाया जो लंदन में भारतीय स्वाद एवं मसालों से बने स्वादिष्ट वड़ा पाव और दाबेली उपलब्ध करवाएंगे ।
 
अब सबसे बड़ी मुसीबत अपने स्टाल के लिए जगह ढूढना था क्योंकि माली आर्थिक हालत में पॉश इलाके में दुकान किराये लेना उनके बस की बात नहीं थी । बहुत जगह धक्के खाने के बाद एक आइसक्रीम पार्लर के मालिक ने अपनी दुकान के बगल में किराये पर अपनी स्टाल लगाने की सहमति दे दी लेकिन उनके लिए स्टॉल के किराये के लिए ३५००० रुपये जमा करना भी बड़ी मुसीबत से कम नहीं था । इस मुफलिसी के दौर में भी दोनों दोस्तों ने हार नहीं मानी और जैसे-तैसे अपना पहला वड़ा पाव स्टाल खोल ही दिया ।
 

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स्टॉल खोलने के बाद सबसे बड़ी समस्या थी ग्राहकों को जोड़ना क्योंकि लंदन में भारतीय व्यजनों के लिए उच्च गुणवत्ता तथा कम पैसे वाले रेस्टोरैंट की अभी भी कमी थी, इसी का फायदा उठाते हूए, सुजय और सुबोध ने अपने वड़ा पाव और दाबेली की कीमत कम रखीं तथा साथ ही कभी-कभी ऑफर्स के जरिये ग्राहकों को लुभाने का कम शुरू कर दिया ।




 
धीरे-धीरे वड़ा पाव और दाबेली का स्वाद वहां के लोगों की जुबान पर चढ़ गया तथा आज वो अकेली स्टॉल पर 60 से ज्यादा प्रकार के भारतीय व्यंजन उपलब्ध है , साथ ही उनका सालाना टर्नओवर 4.4 करोड़ रुपये हो गया है ।

मेहनत और लगन के दम पर सुजय-सुबोध ने विदेशी धरती पर भी अपने बिज़नेस हुनर का जलवा दिखा दिया है तथा मुसीबत के दौर से निकले एक छोटे से आईडिया में उनकी ज़िन्दगी को पूरी तरह से बदल दिया है ।

 

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