बिना हाथों के 22000 किलोमीटर पैरो से कार चलाने वाले जाबांज की गाथा

एक दुखद घटना में अपने दोनों हाथ खोने वाले इंदौर के विक्रम अग्निहोत्री के लिए ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करना किसी सपने के पुरे होने से कम नहीं है।

बचपन में करंट के झटके से अपने दोनों हाथ गवाने वाले विक्रम के लिए ज़िन्दगी का सफर कभी आसान नहीं रहा है , अपने हाथों की कमी को पूरा करने के लिए विक्रम ने अपने पैरो को ऐसे प्रशिक्षित किया कि वो अपने सारे काम कर सके। उन्होंने एक साधारण विद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त करके मास्टर्स की डिग्री हांसिल करने के बाद अब वो एक गैस एजेंसी के मालिक हैं।
 
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यद्यपि विक्रम ने अपने जीवन में कई अलग तरह के कार्य किये जो उसके लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य थे, तीन साल पहले तक विक्रम ने कभी भी खुद गाड़ी ड्राइव करने का नहीं सोचा था लेकिन दूसरों पर निर्भरता कम करने के लिए विक्रम ने खुद ड्राइविंग सिखने की ठान ली।
 



 
उसके लिए उसने 2014 में आटोमेटिक गियर वाली एक कार खरीद ली लेकिन कोई भी ड्राइविंग स्कूल या ट्रेनर विक्रम को सिखाने के लिए तैयार नहीं था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी एवं स्वयं से इंटरनेट पर उपलब्ध वीडिओज़ देखकर पैरो से कार चलाना सिख लिया।

लेकिन यह तो सिर्फ कठिनाइयों की शुरुआत थी क्योंकि जब विक्रम ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए RTO ऑफिस पहुंचा तो उसे लाइसेंस देने के लिए मना कर दिया गया क्योंकि शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति को लाइसेंस देने को कोई कानूनी प्रावधान नहीं था ।
 
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विक्रम ने यहाँ पर भी हार नहीं मानी और अपनी इस लड़ाई को अदालत तक ले गए और लगातार कोर्ट में पेश होते रहे जब तक कि कानून में संशोधन नहीं हुआ। कानून संशोधन के बाद विक्रम जैसे दिव्यांगों के लिए नयी राह खुल गयी और लाइसेंस प्राप्त करने के बाद विक्रम अब तक लगभग 22000 किलोमीटर कार चला चुके है ।
 


 

वर्तमान में विक्रम एक सोसाइटी के जरिये समाज में जागरूकता फ़ैलाने के लिए मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में कार्य कर रहे हैं , जिसके जरिये वो स्कूली बच्चों के साथ ही कॉर्पोरेट जगत में भी प्रेरक व्याख्यान देते है ।

विक्रम आज कार ड्राइविंग के साथ ही स्विमिंग और फूटबाल भी खेलते है और यह सब मुमकिन हो पाया हे उनके कभी न हरने के जज्बे के साथ ही अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से मिले साहस एवं समर्थन की वजह से ।

आज भी अगर समाज और परिवार विक्रम जैसे दिव्यांगों का हौसला बढ़ाये तो कई नयी प्रतिभाए बहार निकलकर आ सकती है तथा किसी के दया पात्र से बदलकर समाज को नित नयी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं ।

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