बचपन में आँखों के संक्रमण के बाद भारत की पहली ब्लाइंड कॉमेडियन बनने की कहानी

एक ऑपरेशन के बाद ज़िन्दगी कैसे बदल जाती है, वो किसी से छुपा हुआ नहीं है लेकिन अगर ऑपरेशन के बाद आपकी आँखों की रोशनी चली जाये तो कई लोग हार मान कर अपनी किस्मत को कोसते रह जाते है लेकिन कुछ लोग ज़िंदादिल होते है जो अपने आप में मिसाल बन जाते है , हम बात कर रहे है निधि गोयल की ।

बचपन में पेंटिंग की शौक़ीन निधि, जो बड़ी होकर एक पोट्रैट आर्टिस्ट बनना चाहती थी लेकिन 15 साल की उम्र में आँखों के संक्रमण के कारण अपनी आँखों की रौशनी को खोने वाली, आज एक स्थापित ब्लाइंड एक्टिविस्ट है तथा लैंगिक और दिव्यांगों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित कर रही है।



 

२ वर्ष पहले , निधि ने स्टैंड-अप कॉमेडी में भी हाथ आजमाया और भारत की पहली दिव्यांग स्टैंड-अप कॉमेडियन बन गयी, उसने दिव्यांगों के निजी ज़िन्दगी को कॉमेडी में पिरोकर दिव्यांगों के संघर्षों को नया आयाम दिया है ।

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उन्होंने एक इंटरव्यू में कहाँ कि ” अपनी अंधता के शुरुआती दिनों में सब कुछ हास्यास्पद  चल रहा था , जो चीज़े में नहीं देख सकती थी , उसे भी महसूस करना और लोगो को यकीं दिलाना की वाकई में वो चीज़ आपके आसपास ही है । कॉमेडी का मूलमंत्र भी यही है कि आपके आसपास हो रही चीज़ों या क्रियाओं से ख़ुशी या हंसी ढूंढी जाये।

 



 

उन्होंने समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता प्रमदा मेनन के सुझाव पर स्टैंड-अप कॉमेडी लेने का फैसला किया, यद्यपि कभी भी उसके दिमाग में कॉमेडी का ख्याल नहीं आया था लेकिन बचपन से ही अपने अनुभवों को कॉमेडी के माध्यम से व्यक्त करना अच्छा लगता था तो अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर कॉमेडी करना और भी आसान हो गया।

 

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एक अन्य इंटरव्यू में निधि गोयल के अनुसार ” जिन घटनाओ के बारे में आप सुनते है और उन पर हसते है वो या तो मेरा निजी ज़िन्दगी का अनुभव होता है या फिर मेरे दोस्त या मेरे जैसे ही दिव्यांगों के ज़िन्दगी का अनुभव । एक दिव्यांग या सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में , मै कई लोगों से मिलती है जो मेरी ही तरह दिव्यांग होते है तो मेरी कॉमेडी का एक बड़ा हिस्सा , उनकी कहानियों के किस्से होते है जो हमने एक दूसरे से वार्तालाप के दौरान सुनाते हैं । ये किस्से खासकर आम दुनियां के मिथको से कई कोसों दूर एक दिव्यांग के संघर्ष की कहानी होते है तथा विकलांगता की धारणाओं को झुठलाते है ।

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