गाँधी जयंती विशेष : आज शर्मिन्दा हूँ

आज शर्मिन्दा हूँ, समाज़ पर स्वार्थ को हावी होता देखकर, सत्य को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से हारता देखकर समझदारी को कटुता

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